विचार-विमर्श
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स्त्रीद्वेषी समाज का अंतिम हथियार है चरित्र-हनन!
‘नेहा सिंह राठौर के साथ जो हुआ वह न सिर्फ हमारे समाज की गंदी मानसिकता को उजागर करता है बल्कि…
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हिन्दी दिवस विशेष: हिन्दी आज भी पराई क्यों है?
‘प्रतिवर्ष 14 सितंबर को सरकारी दफ्तरों, निकायों और महकमों में हिंदी दिवस का आयोजन किया जाता है। एक रस्मी उत्सव…
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डॉ. राम पुनियानी का लेख- भारतीय समाज की पितृसत्ता के मूल में है धर्मसत्ता?
‘भाजपा की तत्कालीन उपाध्यक्ष विजयाराजे सिंधिया संसद भवन तक एक जुलूस लेकर गईं जिसमें सती को एक गौरवशाली भारतीय परंपरा…
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80वां स्वतंत्रता दिवसः किस दिशा में जा रहा है हमारा लोकतंत्र?
‘पिछले कुछ दशकों में भारतीय दक्षिणपंथ के उदय के साथ आरएसएस और उसके कुनबे ने राष्ट्र की दिशा और उसके…
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गालियों का भी अपना समाजशास्त्र रहा है- प्रियदर्शन
‘सभ्यता और भाषा का रिश्ता बहुत अन्योन्याश्रित है- एक-दूसरे पर निर्भर। भाषा ने सभ्यता बनाई, सभ्यता ने भाषा बनाई। लेकिन…
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डाॅ. राम पुनियानी का लेख-RSS मुखिया द्वारा हिंदुओं का किया गया वर्गीकरण कितना सही ?
‘आरएसएस यह भी कहता रहा है कि हिन्दू दरअसल एक धर्म नहीं वरन् एक जीवनशैली है। यह कथन समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण…
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डाॅ. राम पुनियानी का लेख- ईसाई मिशनरी और धर्मांतरण का मुद्दा, क्या है आरएसएस के दावों के पीछे का सच ?
‘प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने नियोगी समिति की सिफारिशों को खारिज कर दिया क्योंकि उसके द्वारा प्रस्तावित प्रतिबंध हाल…
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क्या धार्मिक आस्थाओं का राजनीतिक अस्थि संचय हो रहा है ? -श्रवण गर्ग
‘नागरिक क्यों आश्वस्त होना चाहते हैं कि कथित तौर पर जो एक राजनीतिक आपातकाल देश में पहले से ही उपस्थित…
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डॉ. राम पुनियानी का आलेख- सोमनाथ के लुटने से लेकर अयोध्या में ‘चंदा चोरी‘ तक
‘मंदिर को लूटा गया और घोटालेबाजों को न तो भगवन का कोई डर था और ना ही उनका धर्म से…
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