कविता
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शंकरानंद की चार कविताएं
1. चमकती दोपहर में जिन सड़कों से गुजरता हूंउसके पास के घरों की आवाजेंछन कर बाहर आती हैंजबकि उनके बाहर…
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चंदन कुमार की कविता- धरती की जीवटता हमारे हिस्से आई
सदियों से संघर्ष करने से हम नहीं डरेहम नहीं डरे किसी पहाड़, खदान से पार निकलने मेंहम आजीवन लड़ते रहेऔर…
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हम! युद्ध से बचे हुए लोग
युद्ध में मारे गये लोगअब कभी वापस नहीं आयेंगे,न ही जीवित हो पायेंगे वे बच्चेजो दफ़्न हो चुके हैंइमारतों के…
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निर्मला पुतुल की कविता – क्या तुम जानते हो
क्या तुम जानते होपुरुष से भिन्नएक स्त्री का एकांत? घर, प्रेम और जाति से अलगएक स्त्री को उसकी अपनी ज़मीनके…
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आसिफ़ अली मंसूरी की कविता
मैं देख रहा हूँ—सभ्यता की फटी हुई जेब सेगिरते जा रहे हैं मनुष्य के चीथड़े। धूल से सनी सड़कों परएक…
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जसिंता केरकेट्टा की कविता- सभ्यताओं के मरने की बारी
ऑक्सीजन की कमी सेबहुत-सी नदियाँ मर गईं पर किसी ने ध्यान नहीं दियाकि उनकी लाशें तैर रही हैं मरे हुए…
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नरेश सक्सेना की कविता – सुनो चारुशीला
तुम अपनी दो आँखों से देखती हो एक दृश्यदो हाथों से करती हो एक काम दो पाँवों सेदो रास्तों पर…
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कँवल भारती की कविता
अक्सर ख्याल आता है किमैं किसी अंतहीन भीड़ में समा जाऊँ,जहाँ से लौटना न हो मुमकिनन भीड़ ख़त्म हो और…
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