विचार-विमर्श
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उपन्यास और स्त्री
‘उपभोक्तावादी संस्कृति ने स्त्री को तमाम विकल्प जरूर उपलब्ध कराए लेकिन इसकी नकारात्मक छवियों से वह अपना बचाव न कर…
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डॉ. राम पुनियानी का लेख- धार्मिक त्यौहार बने नफरत फैलाने के औज़ार
‘रामनवमी और जन्माष्टमी के जुलूसों के चरित्र में आमूल परिवर्तन आ गया है. अपने बचपन में मैं इन जुलूसों में…
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डॉ. राम पुनियानी का लेख — किन वजहों से हुए मोदी मजबूत ?
‘सन् 1978 में जनता पार्टी सरकार में आडवानी के सूचना प्रसारण मंत्री बनने के बाद से ही मीडिया का झुकाव…
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अनुशासन या सरकारी शिकंजा ? क्यों यूपी के विश्वविद्यालयों में ड्रेस कोड लागू करना चाहती है बीजेपी सरकार ?
‘मंत्री योगेंद्र उपाध्याय जिस ” सकारात्मकता , समरसता , अनुशासन और संस्कारित माहौल” की बात कर रहें हैं आखिर उसका…
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डॉ. राम पुनियानी का लेख- क्यों फिर से गाय पर शुरू हुई राजनीतिक बहस ?
‘गुजरात के एक अन्य प्राध्यापक ने बेजोड़ शोध कर बताया कि गौमूत्र में सोना होता है. सोने की आसमान छूती…
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राजनीति में जो गाय जिंदा है,वह जमीन पर मर रही है!
‘जैसलमेर की वे तस्वीरें किसी सभ्य समाज के चेहरे पर कालिख की तरह चिपक जानी चाहिए थीं. गर्मी,भूख,प्यास, लापरवाही और…
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नेहरू के पुण्य स्मरण के बहाने ‘भारतीयता’ की खोज !
‘बहुत मुमकिन है देश ने तब महसूस नहीं किया हो और हक़ीक़त रही हो कि नेहरू द्वारा प्रतिपादित ‘भारतीयता’ के…
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नेहरू की पुण्यतिथि पर विशेष : नेहरू और पटेल को बैलों की एक जोड़ी के रूप में देखते थे गांधीजी
“इस तरह ऐसे कुछ मुद्दे थे जिनको लेकर दोनों में मतभेद थे। परंतु पटेल इस बात को महसूस करते थे…
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आरएसएस-भाजपा और अमेरिका की दासता की ओर बढ़ता भारत
‘2014 के बाद से भारत की विदेश नीति में धीरे-धीरे बदलाव होता गया और उस पर अमेरिका का प्रभुत्व कायम…
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लोकतांत्रिक मूल्यों पर हिन्दू राष्ट्रवाद का हमला क्यों?
‘भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज कराते हुए सरकार बनाई. लेकिन यह लोकतांत्रिक मानदंडों से बहुत हटकर थी. पश्चिम बंगाल में…
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