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श्रवण गर्ग का लेख – संजय सिंह को कौन बताए कि मोदी जी ‘निर्मम क्यों है ?’

पत्रकार श्रवण गर्ग
पत्रकार श्रवण गर्ग

‘मोदीजी अगर सभी असंतुष्ट लोगों की बात सुनने लग गए होते और हर बात का जवाब देने बैठ जाते तो फिर बारह सालों के दौरान लगभग सौ देशों की इतनी निश्चिंतता से यात्राएँ कर ढेर सारे अवॉर्ड्स प्राप्त करना तो बहुत दूर,एक दिन के लिए भूटान तक भी नहीं जा पाते !’ पढ़ें वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग का पूरा लेख…

सोनम वांगचुक को किसी भी तरह मनाया जाना चाहिए या कोई सम्मानपूर्ण रास्ता खोजा जाए जिससे कि वे अपना आमरण अनशन ख़त्म कर दें। खोजे जाने वाले उपायों में एक यह भी हो सकता है कि अण्णा हजारे को दिल्ली लाकर उनसे अपील करवाई जाए।

ऐसा लगता है आमरण अनशन पर बैठने से पहले वांगचुक ने अरविंद केजरीवाल से एक्सपर्ट ओपिनियन नहीं ली थी अन्यथा आम आदमी पार्टी के ‘चतुर’ (नेता) ‘थ्री इडिअट्स’ के प्रेरणा पुरुष को मोदी के सामने इतनी बड़ी जोखिम उठाने की कभी सलाह नहीं देते।

अण्णा हजारे के और सब योगदानों को छोड़ दें तब भी अपनी बात मनवाने के लिए गांधीजी के जिस अंतिम हथियार का उन्होंने प्रथम शास्त्र के तौर पर हमेशा सफलतापूर्वक दुरुपयोग किया वह बात-बात पर आमरण अनशन पर बैठ जाना ही रहा ! पर वह ज़माना डॉ मनमोहन सिंह जैसे प्रधानमंत्री की मानवीय हुकूमत का था।

मनमोहन सिंह सरकार द्वारा हजारे के ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन के दौरान दल के दल बनाकर बातचीत के लिए रामलीला मैदान भेजे जाते रहे।सारी शर्तें मान ली गईं।आंदोलन ख़त्म करवा कर अण्णा को महान नेता बनवा दिया गया । नरेंद्र मोदी की सरकार के सत्ता में आने के बादसे अण्णा रालेगण सिद्धि में ही स्थिर हैं।

वांगचुक अपने इस पूर्व अनुभव के बाद भी अनशन पर बैठ गए कि इसी हुकूमत ने उन्हें एनएसए के तहत 170 दिनों तक तपती गर्मी में जोधपुर की जेल के एकांतवास में बंद रखने के बाद इसी साल रिहा किया था।स्टेन स्वामी हों या उमर ख़ालिद किसी भी तरह के प्रतिरोध के लिये मोदीजी के लोकतंत्र में गुंजाइश नहीं है।

‘आम आदमी पार्टी’ के सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया X पर प्रधानमंत्री से सवाल किया है कि वांगचुक के अनशन के मुद्दे पर वे आख़िर चुप क्यों हैं ? “ सोचकर तकलीफ़ होती है मोदीजी, आप इतने निर्मम कैसे हो सकते हैं ? सोनम वांगचुक जैसे पढ़े-लिखे शख़्स पेपर लीक के ख़िलाफ़ अनशन पर बैठे हैं। उनका वजन सात किलो घट चुका है।मोदीजी को तो उनकी बात सुनने की फुर्सत नहीं है,’ संजय सिंह कहते हैं !

मोदीजी अगर सभी असंतुष्ट लोगों की बात सुनने लग गए होते और हर बात का जवाब देने बैठ जाते तो फिर बारह सालों के दौरान लगभग सौ देशों की इतनी निश्चिंतता से यात्राएँ कर ढेर सारे अवॉर्ड्स प्राप्त करना तो बहुत दूर,एक दिन के लिए भूटान तक भी नहीं जा पाते ! मोदीजी अगर वांगचुक के अनशन पर चुप्पी तोड़ दें तो संजय सिंह उनसे फिर राममंदिर के चंदे-चढ़ावे का हिसाब पूछने लगेंगे !

संजय सिंह ने पूछा है कि मोदीजी इतने निर्मम कैसे हो सकते हैं ? संजय सिंह शायद भूल गए हैं कि केजरीवाल सरकार की आबकारी नीति के मामले में ED ने उन्हें अक्टूबर 2023 में गिरफ़्तार कर छह महीने तक जेल में बंद रखा था। सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद ही 2024 में वे रिहा हुए थे।

मोदीजी जिस तरह से सरकार चलाना चाहते हैं उसमें उनका निर्मम होना या नज़र आना ज़रूरी हो गया है। तीन काले कृषि क़ानूनों के विरोध में नवंबर 2020 से दिसंबर 2021 तक चले किसान आंदोलन में 750 प्रदर्शनकारियों की मौतें हुईं थीं। क्या मोदीजी की तरफ़ से कभी कोई खेद व्यक्त किया गया ?

मोदीजी ने माफ़ी इस बात को लेकर अवश्य माँगी थी कि क़ानूनों की सच्चाई को पूरी तरह से समझा पाने की उनकी तपस्या में शायद कोई कमी रह गई ! संजय सिंह को पता है कि सांसदों के सदन से निलंबन के बाद क़ानून किस तरह से राज्य सभा में पास करवाए गए थे !

मोदी सरकार को किसी की भी कोई बात सुनने की फ़ुरसत नहीं है ! बीजेपी के पितृ संगठन आरएसएस की बात भी नहीं ! पार्टी के उन बुजुर्ग नेताओं की भी नहीं जिन्होंने बीजेपी को सत्ता में लाने के लिए आहुतियाँ दीं थी और अब किसी अज्ञात ‘मार्गदर्शन मंडल’ में साँसें गिन रहे हैं।

वांगचुक को अगर कुछ हो गया तो अभिजीत दीपके की’ कॉकरोच जनता पार्टी’ के करोड़ों सोशल मीडिया फ़ॉलोअर्स पूरी तरह डीमोरेलाइज़्ड हो जाएँगे ! हुकूमत सारे ही जन-आंदोलनों को बिना सरकारी हस्तक्षेप के हतोत्साहित और निराश होते देखना चाहती है।अतः वांगचुक के आमरण अनशन को अगर जारी रहने दिया जाता है तो उसे सरकार की मदद करने जैसा ही माना जाना जाएगा।

संजय सिंह और अन्य विपक्षी नेता अगर वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य को लेकर ईमानदारी से चिंतित हैं तो उन्हें लद्दाखी नेता के आमरण अनशन को तुरंत समाप्त करवाना चाहिए ! मोदीजी के उत्तर की प्रत्याशा में वांगचुक का अनशन जारी रखना भी एक तरह की निर्ममता ही होगी !

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