साहित्य
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शंकरानंद की चार कविताएं
1. चमकती दोपहर में जिन सड़कों से गुजरता हूंउसके पास के घरों की आवाजेंछन कर बाहर आती हैंजबकि उनके बाहर…
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चंदन कुमार की कविता- धरती की जीवटता हमारे हिस्से आई
सदियों से संघर्ष करने से हम नहीं डरेहम नहीं डरे किसी पहाड़, खदान से पार निकलने मेंहम आजीवन लड़ते रहेऔर…
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रमेश जोशी का व्यंग्य- ‘सर फोड़ना’
‘देखो गालिब ने भी यही कहा है कि अपने दुख का हाला मचाने में शर्म मत करो । जहाँ भी…
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रमेश जोशी का व्यंग्य- मियाँ की जूती मियाँ के सिर
‘अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं…
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जिस राजघराने में हुआ जाति के कारण अपमान, वर्षों बाद उसी महल में हुआ राजसी ठाठ के साथ सम्मान…कौन थे जोधपुर के “भंगी जाति के उपकुलपति” ?
राजस्थान की जोधपुर रियासत में कभी एक दलित बच्चे की माँ को उसकी जाति के कारण अपमान सहना पड़ा था।…
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अवाम का महबूब शायर बशीर बद्र
‘उनके जीवन की एक दुखद विडंबना यह भी रही कि अंतिम वर्षों में वे डिमेंशिया (स्मृति-लोप) जैसी बीमारी से जूझते…
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हम! युद्ध से बचे हुए लोग
युद्ध में मारे गये लोगअब कभी वापस नहीं आयेंगे,न ही जीवित हो पायेंगे वे बच्चेजो दफ़्न हो चुके हैंइमारतों के…
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देश बंटवारे का ज़हर चित्रित करता निर्मला भुराड़िया का उपन्यास ‘ज़हरखुरानी’
‘लेकिन इतनी बड़ी और भयावह घटना पर जो विराट हूक दिखनी चाहिए थी, वह हिंदी के संसार में अदृश्य और…
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निर्मला पुतुल की कविता – क्या तुम जानते हो
क्या तुम जानते होपुरुष से भिन्नएक स्त्री का एकांत? घर, प्रेम और जाति से अलगएक स्त्री को उसकी अपनी ज़मीनके…
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