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हम! युद्ध से बचे हुए लोग

युद्ध में मारे गये लोग
अब कभी वापस नहीं आयेंगे,
न ही जीवित हो पायेंगे वे बच्चे
जो दफ़्न हो चुके हैं
इमारतों के ध्वंसावशेषों के नीचे।

अभी तो देखनी शुरू की थी उन्होंने यह रंग-बिरंगी दुनिया
अपनी चमकीली आंखों से,
बस अभी ही तो सीखा था उन्होंने चलना
फिर धीरे-धीरे दौड़ना,
फूलों, तितलियों, गलियों में घूमते कुत्ते
छतों पर फुदकती चिड़ियों से खेलना,
वे अपने नन्हें पैरों से नाप देना चाहते थे
यह पूरी धरती
और छोटी-सी मुट्ठी में भर लेना चाहते थे
यह पूरा आकाश ।
नहीं! वे अभी ना-वाकिफ़ थे
तुम्हारी स्याह दुनिया से,
जिसमें है सिर्फ युद्ध, सीजफायर, कन्वेंशन और “पीस ऑर्गनाइजेशन”
नहीं ! वे बच्चे अभी नहीं जानते थे क्या होते हैं परमाणु बम, मिसाइलें, फाइटर जेट और ऑयल रिज़र्व,
नहीं! उन्होंने अभी नहीं जानी थी धर्म, नस्ल और राष्ट्रीयता की तुम्हारी खोखली और मनुष्यता-विरोधी अवधारणाएं,
वे तो जानते थे सिर्फ
यह धरती, यह आकाश और
अपनी मां का आंचल !

युद्धोन्मत सत्ताधीशों के ऐलान पर
वे लोग जो भेजे गये थे युद्धों पर
धर्म और राष्ट्र बचाने के नाम पर
दूसरी धरती पर बम बरसाने के लिए,
वे तो करना चाहते थे प्रेम
धर्म, नस्ल और राष्ट्र की सीमाओं से जाकर परे,
वे तो बरसाना चाहते थे फूल हर धरती पर ।
और वे जो वापस लौटे हैं
भीषण युद्ध के बाद,
अपनी देह के चीथड़े लिए
देखकर स्तब्ध हैं
लहूलुहान धरती पर सड़ती-गंधाती हजारों लाशों पर
क्रूर हंसी हंसते हुए
अपने-अपने हुक्मरानों का एक मंच पर आकर हाथ मिलाना
और मुस्कुराते हुए जारी करना
“शांति का संयुक्त वक्तव्य “।

इसलिए हम
युद्ध में बचे हुए,
युद्ध से बचे हुए लोग
दुनिया के सभी हुक्मरानों से
विद्रोह करते हैं ,
हम विरोध करते हैं
तुम्हारी युद्ध-उ‌द्घोषणाओं का, जिसने पाटी धरती मनुष्यों की लाशों से
रक्त-रंजित की नदियां और रौंद डाली सभ्यताएं !
हम विरोध करते हैं
तुम्हारे साम्राज्यवादी, कट्टरपंथी, अंध-राष्ट्रवादी जुलूसों का,
जिसमें नंगी की गई औरतें
शत्रु देशों की,
और बच्चियों से हुए बलात्कार !
हम विद्रोह करते हैं क़ातिल हुक्मरानों !
तुम्हारी बनाई दुनिया से,
तुम्हारी बनाई व्यवस्था से,
तुम्हारी हिंसक नीतियों से,
तुम्हारी झूठी शांति-वार्ताओं से
हम विद्रोह करते हैं !
हम विद्रोह करते हैं !

रोशनी रावत

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