साहित्य
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व्यंग्य – अधम शरीर
‘ हम तो छह महिने लुंगी में रहने वाले, हफ्ते दस दिन में एक बार ट्रिमर से दाढ़ी खुरचने वाले…
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कँवल भारती की कविता
अक्सर ख्याल आता है किमैं किसी अंतहीन भीड़ में समा जाऊँ,जहाँ से लौटना न हो मुमकिनन भीड़ ख़त्म हो और…
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प्रेम में चोट खाया राजा, गायब होती दुल्हनें! जानिए रहस्य…
एक की बेवफाई का बदला लेने के लिए राजा सारी दुल्हनों के गले उतार लिया करता था। रात होने से…
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