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क्या ‘काक्रोच जनता पार्टी’ कामयाब होगी?

अभी नई-नई उभरी काक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी), जिसके मुखिया अभिजीत दिपके, जो बोस्टन में पढ़ रहे हैं, आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। दलित वर्गों को इस पार्टी से कोई उम्मीद नहीं पालनी चाहिए, क्योंकि यह वास्तव में अन्ना हजारे आन्दोलन वाला ही गुट है। यह अपर कास्ट का ही पूरा झुण्ड है, जिसने अपने एजेंडे में जातिवाद पर कोई बात नहीं करी है। बेशक इस गुट ने बेरोजगारी के मुद्दे को उठाया है, पर इसने आरएसएस और भाजपा के जातीय और साम्प्रदायिक चरित्र पर कोई टिप्पणी नहीं की है। आरएसएस और भाजपा ने लोकतंत्र के विरुद्ध जिस एसआईआर का जाल बुना है, वह भाजपा के जीतने की सौ प्रतिशत गारंटी है। सीजेपी ने उसके विरुद्ध एक शब्द नहीं बोला है। एसआईआर के रहते सीजेपी कोई चुनाव नहीं जीत सकती। इसे देश की ज़मीनी हकीकत का ज्ञान नहीं है। ये लोग बिना सिस्टम को बदले चुनाव लड़ने की बात कर रहे हैं, इसी से समझ लेना चाहिए कि इनका मकसद सिस्टम बदलना नहीं है।
दूसरी बात यह कि अगर वे सत्ता में आ भी गए, तो इनका आर्थिक कार्यक्रम क्या होगा, इसका कोई खुलासा उन्होंने नहीं किया है।
तीसरी बात यह कि यह केवल सोशल मीडिया पर चल रहा प्रोपेगंडा है। इनके लाखों फॉलोवर्स बढ़े हैं, इसमें कोई संदेह नहीं। अन्ना हजारे आन्दोलन में भी देश के कोने-कोने से लाखों लोग आकर शामिल हुए थे। लाखों-करोड़ों फॉलोवर्स का होना इस बात की गारंटी नहीं है कि वे मोदी और हिंदुत्व के भी खिलाफ हैं। अगर ये वास्तव में सत्ता को बदलना चाहते हैं, तो ये नेपाल की तरह जमीनी आन्दोलन क्यों नहीं कर रहे हैं? आन्दोलन सड़कों पर होता है, सोशल मीडिया पर नहीं।
चौथी बात मुझे यह कहनी है कि यह अपर कास्ट की पार्टी है, और अपर कास्ट का नेतृत्व कोई समस्या हल नहीं करता है। इतिहास गवाह है कि अपर कास्ट ही भारत की हर समस्या की जड़ में है। इसलिए अपर कास्ट पर दलित-पिछड़े वर्गों को भरोसा नहीं करना चाहिए। इस पार्टी के निर्माण में मुझे अरविन्द केजरीवाल का हाथ लगता है।
कँवल भारती

फेसबुक से साभार

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