दिल्ली में पहली बार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पेलेट गन का इस्तेमाल?

दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी (Cockroach Janta Party) के “चलो संसद” मार्च के दौरान पुलिस और आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) की कार्रवाई में विवाद हो गया है। कुछ प्रदर्शनकारियों और संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास के आरोप हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन और शॉक बैटन (इलेक्ट्रिक शॉक देने वाले डंडे) का इस्तेमाल किया गया। कुल अस्सी घायलों में (जो अस्पताल पहुँचे)से एक के शरीर से पैलेट गन के छर्रे डाक्टरों द्वारा निकाले जाने की ख़बर द हिंदू में प्रकाशित हुई है ।
यह दिल्ली में पहली बार होने का दावा किया जा रहा है। आरएएफ की भीड़ नियंत्रण की किट में यह उपकरण शामिल हैं। इससे पहले पेलेट गन का इस्तेमाल हरियाणा में 2024 के किसान आंदोलन, मणिपुर (2023) और कश्मीर (2016) में हुआ था। पेलेट गन से कई गोली जैसी छोटी-छोटी धातु की गेंदें निकलती हैं, जो निशाने को घायल कर सकती हैं और आंखों में लगने पर अंधापन भी पैदा कर सकती हैं।
प्रदर्शन के दौरान करीब 60 से 80 प्रदर्शनकारी घायल बताए गए (कुछ रिपोर्ट्स में ज्यादा)। एक प्रदर्शनकारी का इलाज सरकारी अस्पताल में हुआ, जहां उसके आंख के नीचे और गर्दन से पेलेट निकाले गए। ऑपरेशन की खबर सोशल मीडिया और सीजेपी के दावों में फैली।
हालाँकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि पेलेट गन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं हुआ। पीआईबी फैक्ट चेक और पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट को फेक न्यूज बताया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारों ने बैरिकेड तोड़े, पत्थरबाजी की और 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। लाठीचार्ज, आंसू गैस और सामान्य बल का इस्तेमाल किया गया। कुछ वीडियो में नाखून वाले बैटन की भी बात आई, लेकिन पुलिस ने उसे भी पुराना या असंबंधित बताया।
इस घटना पर दोनों तरफ के दावे हैं। पुलिस ज़्यादती के असंख्य वायरल वीडियोज ने दुनियां भर में फैले भारतीय समुदाय में विक्षोभ पैदा कर दिया है । प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अत्यधिक बल का इस्तेमाल हुआ, पेलेट जैसी चीजों का इस्तेमाल हमेशा विवादास्पद रहता है क्योंकि ये स्थायी चोट पहुंचा सकती हैं।
(संदर्भ: टाइम्स नाउ, इंडिया टुडे, द हिंदू, पुलिस बयान आदि हालिया रिपोर्ट्स से।)
-वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह



