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	<title>व्यंग्य Archives - Adahan Patrika | अदहन पत्रिका</title>
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	<title>व्यंग्य Archives - Adahan Patrika | अदहन पत्रिका</title>
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		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य- मियाँ की जूती मियाँ के सिर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:50:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं । उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन &#8230;</p>
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<p><strong>&#8216;अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं । उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन कर काटने योग्य क्यों घोषित कर दिया जाता है ?&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p>तोताराम ने बैठते ही पूछा- माताजी का क्या हाल है ?</p>



<p>हमने कहा- क्या बहकी-बहकी बात कर रहा है । इस गई 20 अप्रैल को माताजी को गुजरे 26 साल हो गए और आज तू हाल पूछ रहा है ।वैसे तो प्राण निकलने के साथ ही सब खेल खत्म हो जाता है लेकिन धर्म के नाम पर मुफ़्त का माल खाने वाले परजीवी लोग स्वर्ग नरक का चक्कर चलाकर कभी श्राद्ध, कभी बरसी के नाम पर ठगते रहते हैं । मरे हुए के नाम पर जिंदा का जीना हराम किये रहते हैं । अगर इसी रफ्तार से जगद्गुरु की वैज्ञानिक सोच बढ़ती रही तो ये लोग आपके मृत माता-पिता के नाम से अपना रिचार्ज करवाने लगेंगे कि यजमान आपकी माताजी के ताजा हालचाल मिलते रहने के लिए तीन हजार का जियो का रिचार्ज करवा दीजिए ।</p>



<p>बोला- मैं ताई के हालचाल थोड़े पूछ रहा हूँ । मैं तो योगी जी की माताजी का हाल जानना चाहता था ।</p>



<p>हमने कहा- तो फिर तुझे योगी जी से पूछना चाहिये । उनकी माताजी सावित्री देवी पौड़ी गढ़वाल में रहती हैं । अगर कुछ ऐसा वैसा हुआ होता तो अब तक तो सारे देश को खबर हो जाती ।</p>



<p>बोला- मैं जन्म देने वाली माता की नहीं, बल्कि बिना घोषित किए ही राष्ट्र की स्वतः सनातन माता ‘गौमाता’ की बात कर रहा हूँ जिसका कुछ मुसलमान धार्मिक नेताओं ने उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ कहकर अपमान किया है । इन पर तो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलता चाहिए । और फौरी न्याय के बतौर इनके घरों पर बुलडोज़र तो तत्काल चला ही दिया जाना चाहिए ।</p>



<p>हमने कहा- इस संसार में सभी पशु ही तो है । शेर, बाघ, भेड़िया हिंस्र पशु हैं; गाएं, भैंस, बकरी, भेड़, घोडा, गधा आदि पालतू पशु हैं । ये चौपाये होते हैं । मनुष्य के दो पैर होते हैं । वह अपने आगे के दो पैरों को हाथों की तरह काम में लेकर औजार बना सकता है, खेती कर सकता है, समाज का निर्माण करता है इसलिए वह एक सामाजिक पशु ( सोशियल एनिमल ) है । जैसे ही मनुष्य ने दो पैरों पर खड़े होना शुरू किया वह पशु से भिन्न हो गया । बंदर भालुओं को भी राम ने अपने साथ लिया क्योंकि वे दो पैरों पर खड़े हो सकते थे और मनुष्य के परिवार के निकट ही थे । साहित्य-संगीत-कला विहीन अंध भक्त भी तो बिना सींग पूंछ के पशु ही हैं । लालची को धन-पशु कहते हैं ।कृष्ण की आठ पटरानियों में से एक ऋक्षराज जांबवान की पुत्री जांबवती थी ।</p>



<p>बोला- गाय हमें दूध पिलाती है इसलिए वह माता है, सभी देशवासी उसका दूध पीते हैं इसलिए वह पशु नहीं राष्ट्रमाता है ।</p>



<p>हमने कहा- अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं । उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन कर काटने योग्य क्यों घोषित कर दिया जाता है ? फिर वह नॉर्थ ईस्ट और गोवा में माता क्यों नहीं है ? अगर माता है तो माता है फिर चाहे कहीं भी, कितनी भी उम्र की हो । मुसलमानों को हड़काने के लिए कुछ और, चुनाव के लिए कुछ और, और हिन्दू मालिकों के बूचड़खानों के लिए कुछ और ।</p>



<p>और फिर भई हमारे पासपोर्ट में तो हमारी वास्तविक माता का ही नाम लिखा हुआ है । जो माता मानते हैं उनके रिकार्ड में चेंज करवा दे । वैसे सावरकर गाय को माता नहीं, एक उपयोगी पशु मात्र मानते थे । तो क्या सावरकर पर भी एफ आई आर करोगे ? और किरण रिजिजू तो घोषित गाय भक्षक है । उसे भाजपा और मंत्रीमंडल से तो कम से कम अभी हटा दो ।</p>



<p>बोला- फिलहाल तो इस मादनी का कुछ करना पड़ेगा जिसने मियाँ की जूती मियाँ के सिर मार दी ।</p>



<p><strong>-रमेश जोशी</strong></p>



<p></p>
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		<title>व्यंग्य &#8211; भक्त सौभाग्य सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश वाले</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 12:16:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;मैं किसी के बाप से डरता हूँ क्या ? मेरा सीना 28 इंच का ही सही लेकिन जितना है सालिड है । और याद रख यह बरामदा संसद है सच्ची ‘जन संसद’ कोई सेंगोल वाले राजतन्त्र की संसद नहीं है । और न ही किन्ही खरीदे हुए, ई डी से डरे हुए, दाढ़ी में तिनके &#8230;</p>
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<p><strong>&#8216;मैं किसी के बाप से डरता हूँ क्या ? मेरा सीना 28 इंच का ही सही लेकिन जितना है सालिड है । और याद रख यह बरामदा संसद है सच्ची ‘जन संसद’ कोई सेंगोल वाले राजतन्त्र की संसद नहीं है । और न ही किन्ही खरीदे हुए, ई डी से डरे हुए, दाढ़ी में तिनके वालों की संसद है । और यह कोई ट्रम्प का कार्यालय थोड़े है जो ‘मे आई कम इन, सर’ कह कर डरते डरते पूछ कर आना होगा ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p>आज जैसे ही बरामदे में झाँका तो देखा, तोताराम ।</p>



<p>हमने खीजते हुए कहा- कल तुझे कहा था ना, वर्क फ्रॉम होम की तरह चाय फ्रॉम होम ।</p>



<p>बोला- मैं किसी के बाप से डरता हूँ क्या ? मेरा सीना 28 इंच का ही सही लेकिन जितना है सालिड है । और याद रख यह बरामदा संसद है सच्ची ‘जन संसद’ कोई सेंगोल वाले राजतन्त्र की संसद नहीं है । और न ही किन्ही खरीदे हुए, ई डी से डरे हुए, दाढ़ी में तिनके वालों की संसद है । और यह कोई ट्रम्प का कार्यालय थोड़े है जो ‘मे आई कम इन, सर’ कह कर डरते डरते पूछ कर आना होगा ।</p>



<p>हमने कहा- फिर भी मोदी जी ने सच्चे देशभक्तों से राष्ट्रहित में जो अपील की है उसका तो सम्मान करना चाहिए कि नहीं ?</p>



<p>बोला- सम्मान है तो सही । मेरे घर से यहाँ आने के लिए किसी वाहन की जरूरत नहीं, कोई पेट्रोल नहीं फुँकता, और तुझे चाय पिलाने के लिए सोना आयात करने कोई अपना नाम कढ़ा 15 लाख का सूट पहनने की जरूरत भी नहीं । इसी 50 रुपए वाली घिसी लुंगी में जिसमें बंगाल में वोट तक नहीं डालने दिया जाता, निःसंकोच चाय पिला सकता है । और मैं कोई प्रश्न नहीं कर सकता कि चाय ठंडी है, एक ही पत्ती को बार बार उबाला गया है, या यह चाय नहीं लकड़ी का बुरादा है, गिलास ढंग से धोया है या नहीं आदि । और तू मोदी जी की तरह 12 साल में एक भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं है ।</p>



<p>हमने कहा- लेकिन चाय पीना क्या जरूरी है ? मोदी जी ने तो यहाँ तक कहा है कि तेल भी कम खाओ । जहाँ गुजरात में हर चीज में गुड़ और मूंगफली का तेल जी भर कर होता है वहाँ के मोदी जी तेल, नमक, चीनी कुछ भी नहीं खाते । यह बात और है कि चुनावी मजबूरी में सड़क किनारे की किसी ऐसी वैसी दुकान से खूब सरसों का तेल और मिर्च डलवाकर झालमुड़ी खाली । तभी तो शंखप्रक्षालन के लिए तीरथ तीरथ जाना पड़ रहा है ।</p>



<p>फिर भी तुझे टी फ्रॉम होम ही पीना चाहिए ।</p>



<p>बोला- तेरे यहाँ चाय पीने आना रूस से सस्ता तेल और ईरान से खाद खरीदने जैसा कोई जघन्य अपराध थोड़े है जिसके लिए ऐसे डरें जैसे कि कहीं एप्सटीन फ़ाइल न खुल जाए ।</p>



<p>और फिर मैं कौनसा मध्य प्रदेश के राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डल के नव नियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर की तरह कार्यभार संभालने के लिए कारों का काफिला लेकर आता हूँ । सुना है समाचारों के अनुसार काफिले में कम से कम 50 और अधिक से अधिक 700 कारें थीं ।जब कि पाठ्यपुस्तक वाला विभाग खान, पुल, सड़क जैसा कमाई वाला विभाग भी नहीं है ।</p>



<p>हमने कहा- उनकी क्या बात करता है ? सबसे पहले तो वे सच्चे भक्त हैं । तेरी तरह मौका परस्त नहीं हैं ।</p>



<p>दूसरे ‘सौभाग्य’ शाली हैं, तीसरे ‘सिंह’ और चौथे सबसे ऊपर ‘ठाकुर’ और पाँचवें ‘मध्यप्रदेश से’ हैं जहाँ से</p>



<p>कोई भी विजय शाह सोफिया कुरैशी को पाकिस्तान की बहिन कहकर भी साफ बचा रह सकता है, कोई भी</p>



<p>कैलाश विजयवर्गीय ‘घंटा’ बयान देकर भी खानदानी संस्कारी बना रह सकता है, नीमच में भंवर लाल को</p>



<p>किसी दूसरे धर्म का लगने मात्र पर किसी भाजपा कार्यकर्ता दिनेश द्वारा पीटा जा सकता है,या</p>



<p>सीधी का प्रवेश शुक्ला किसी आदिवासी के सिर पर पेशाब कर सकता है ।</p>



<p><strong>-रमेश जोशी</strong></p>
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		<title>व्यंग्य- चाय फ्रॉम होम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 08:55:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;मोदी जी को तो वसुधैव कुटुंबकम् के मानने वाले हैं । सब रिश्ते नाते, संबंध निभाने पड़ते हैं । फरवरी में फादर लैंड गए थे तो क्या उसके आसपास में चाचा लैंड, फूफा लैंड, मामा लैंड आदि नहीं जाएंगे ? फिर कभी किसी मौसी, नानी लैंड भी जाना पड़ सकता है ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी &#8230;</p>
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<p><strong>&#8216;मोदी जी को तो वसुधैव कुटुंबकम् के मानने वाले हैं । सब रिश्ते नाते, संबंध निभाने पड़ते हैं । फरवरी में फादर लैंड गए थे तो क्या उसके आसपास में चाचा लैंड, फूफा लैंड, मामा लैंड आदि नहीं जाएंगे ? फिर कभी किसी मौसी, नानी लैंड भी जाना पड़ सकता है ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी  का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p>आज जैसे ही तोताराम आया हमने कुछ नीची नज़रों और नीची आवाज में कहा- हमें माफ करना, तोताराम !</p>



<p>बोला- जैनियों में एक अच्छी प्रथा है ‘क्षमावणी’ । साल में एक बार अपने अच्छे बुरे कर्मों के लिए उल्टे मन से ही सही माफी मांगते हैं । माफी मांगना और माफ करना दोनों ही बड़प्पन की निशानी है । वैसे तो तुझे एक सड़ियल चाय पर रोज एक घंटा अपने मन की बकवास पेलने के लिए बहुत पहले माफी ही नहीं माँगनी चाहिए थी बल्कि प्रायश्चित स्वरूप चांद्रायण व्रत करना चाहिए था ।</p>



<p>हमने कहा- हम चाय और मन की बात के लिए माफी नहीं माँग रहे है । चाय अपने आप में कुछ नहीं होती । वह तो एक संस्कृति और शिष्टाचार है । जिसे कभी कोई चलती ट्रेन में पिलाकर निभाता है तो कभी कोई 15 लाख का सोने के तारों से अपना नाम कढ़ा सूट पहनकर निभाता है । हम तो तुझे, मैना और कुछ परिजनों को एक सरप्राइज़ देना चाहते थे । हमने इसी 10 मई को अपनी शादी के 68 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किसी लक्जरी क्रूज़ शिप से योरप के कुछ देशों के एक महिने के ट्रिप का कार्यक्रम बनाया था । पाँच मिलियन का नॉन रिफंडेबल एडवांस भी दे दिया था लेकिन हम ठहरे मोदीभक्त और मोदी जी ठहरे सच्चे और सबसे बड़े, न भूतो न भविष्यति की श्रेणी वाले देशभक्त । सो देश की अर्थव्यवस्था की नाजुक स्थिति को देखते हुए सभी देशवासियों से विदेश यात्राएं टालने की अपील के कारण अपना यह कार्यक्रम निरस्त कर दिया है । बस, इसीके लिए माफी मांग रहे थे ।</p>



<p>बोला- मास्टर, मैं भी तुमसे एक बात के लिए माफी मांगने वाला था । मैंने भी अपने दोनों परिवारों के साथ चार्टर्ड प्लेन से अयोध्या यात्रा का कार्यक्रम बनाया था । सोचा था प्राणप्रतिष्ठा पर नहीं जा पाए थे । इस साल दशहरे के आसपास मैना अस्सी साल की हो जाएगी सो इस उपलक्ष्य में मैना के वजन के बराबर 55 किलो सोना राममंदिर में दान दे आएंगे । लेकिन मोदी जी ने कहा है कि एक साल तक सोना नहीं खरीदना है ।सो मैंने भी अमेरिका से 55 किलो सोने के आयात का ऑर्डर केन्सल कर दिया है । क्या मैं अपने ऐसे छोटे मोटे शौक कुछ समय के लिए स्थगित नहीं कर सकता ?</p>



<p>हमने कहा- तोताराम, क्या तुमने आज कुछ ज्यादा लंबी तो नहीं फेंक दी ?</p>



<p>बोला- भाई साहब, शुरूआत किसने की थी ?</p>



<p>हमने कहा- तोताराम, सच है झूठे के उपदेश का कोई असर नहीं पड़ता । हमें याद है 1962 में जब हम सीमेंट फेक्टरी सवाईमाधोपुर के स्कूल में अध्यापक थे तो भारत चीन का युद्ध शुरू हो गया था । हमारे स्कूल में चंदे के लिए कलेक्टर आये थे । हमने जोश में आकर अपनी शादी में मिली सोने की अंगूठी दे दी थी । उसके बाद ऐसा संयोग हुआ कि आज तक कोई सोने चांदी तो क्या तांबे पीतल का भी कोई गहना नहीं पहना ।</p>



<p>उसी माहौल में इंदिरा जी ने अपने सभी गहने रक्षाकोष में दे दिए थे । शास्त्री जी ने 1965 के अन्न संकट के समय जब देशवासियों से सप्ताह में एक दिन सोमवार शाम को भोजन न करने का आह्वान किया था तो उसे पहले खुद अपने घर में लागू किया था । एक बार एक महिला गाँधी जी के पास आई और अपने बेटे को गुड़ न खाने की सलाह देने का आग्रह करने लगी । गांधी जी ने उसे तीन दिन बाद आने को कहा । तीसरे दिन जब वह आई तो गाँधी जी उसके बेटे से कहा कि गुड़ खाना तुम्हारे लिए ठीक नहीं है । महिला ने कहा- बापू, जैसे आज आप यह बात कह रहे हैं वैसे ही उस दिन भी कह देते । बिना बात ही दो चक्कर लगवाए । बापू बोले- पहले मैं भी गुड़ खाया करता था तो तुम्हारे बेटे को न खाने के लिए कैसे कह सकता था । अब तीन दिन से गुड़ खाना छोड़ने के बाद मुझमें ऐसा कहने का आत्मबल आया है ।</p>



<p>खुद किसी न किसी बहाने, किसी न किसी मंदिर में जाकर रोड़ शो में करोड़ों फूंकने वाले मोदी जी की अपील का कोई असर नहीं होने वाला । वैसे भी जिस देश में 80 करोड़ लोग दो जून के अन्न के लिए भिखारियों की तरह लाइन लगाते हों वहाँ सोना न खरीदने और विदेश यात्रा न करने के चोंचलों से कुछ नहीं होने वाला । और लो अब चल दिए हवाई यात्रा और मितव्ययिता का उपदेश देकर विदेश यात्रा पर । क्या यह काम यहीं से फोन से नहीं हो सकता था । ट्रम्प ने तो फोन पर ही युद्ध विराम नहीं करवा दिया था क्या ? ये भी कर लेते वर्क फ्रॉम होम ।</p>



<p>बोला- मास्टर, तू इस संसार के लिए मोदी जी के दायित्त्वों को नहीं समझ सकता । वे विश्वगुरु हैं, दुनिया की सुख शांति, सुव्यवस्था की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है उन पर । तेरा क्या है, तू तो साल में छह महिने एक लुंगी में यहाँ बरामदे में बैठा बकवास करता रह सकता है लेकिन मोदी जी को तो वसुधैव कुटुंबकम् के मानने वाले हैं । सब रिश्ते नाते, संबंध निभाने पड़ते हैं । फरवरी में फादर लैंड गए थे तो क्या उसके आसपास में चाचा लैंड, फूफा लैंड, मामा लैंड आदि नहीं जाएंगे ? फिर कभी किसी मौसी, नानी लैंड भी जाना पड़ सकता है ।</p>



<p>हमने कहा- और इसी चक्कर में तीन साल से मणिपुर की ओर ध्यान देने का समय नहीं मिला ।घर से पहले बाहर पोपुलर होने के चक्कर वालों के घर उजड़ते देर नहीं लगती । लेकिन कोई बात नहीं, हम तो एक कदम और आगे जाकर मोदी जी की बात को मानेंगे । अब कल से तेरी चाय भी ‘फ्रॉम होम’ और डिजिटल हुआ करेगी । नो कमिंग तो बरामदा ।</p>



<p><strong>-रमेश जोशी</strong></p>
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		<title>व्यंग्य- ऑटो फेयर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 07:24:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;यहाँ तो एक सामान्य बुलडोज़र तक इतना समझदार होता है कि वह अपराधी का धर्म, जाति, वस्त्र आदि पहचान कर स्वविवेक से न्याय करके निर्णय भी कार्यान्वित कर देता है कि कहाँ, कब, किसका घर, कितना ढहाना है ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230; हमने पूछा- तोताराम, ऑटो फेयर के बारे में पढ़ा ? &#8230;</p>
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<p><strong>&#8216;यहाँ तो एक सामान्य बुलडोज़र तक इतना समझदार होता है कि वह अपराधी का धर्म, जाति, वस्त्र आदि पहचान कर स्वविवेक से न्याय करके निर्णय भी कार्यान्वित कर देता है कि कहाँ, कब, किसका घर, कितना ढहाना है ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा  व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p>हमने पूछा- तोताराम, ऑटो फेयर के बारे में पढ़ा ?</p>



<p>बोला- सीकर में किसी बधाई, फेयर और यात्रा की कोई औकात ही नहीं । अखबार में इसके अलावा और होता ही क्या है ? क्या देखना पढ़ना ? अब चूँकि अखबार एक वैसा ही कार्यक्रम हो गया है जैसे ‘मन की बात’ । जिनको पार्टी में अपने नंबर बढ़ाने हैं, जिन्हें अपनी कुर्सी पक्की करनी है वे सुनते हैं, बल्कि सुनने का नाटक करते हैं लेकिन अब किसी को इससे कोई मतलब नहीं ।रोज कोई न कोई कलश यात्रा निकलती है, कोई न कोई स्कूल इतिहास रचता है और उनसे विज्ञापन लेने वाले अखबार उस विज्ञापन को खबर बनाकर छपते हैं ।</p>



<p>ऐसे ही अखबारों में कोई जनहित या जन सरोकार का या सरकारों के भ्रष्टाचारों के समाचार छापने का साहस तो है नहीं सो ऐसे ही आलतू फालतू समाचारों से पन्ने भर देते हैं ।कभी कोई कलश यात्रा, कभी कोई शोभा यात्रा,कभी कोई लाल नीली, हरी पीली भगवा रैली । और कुछ नहीं तो किसी अखबार की तरफ से कोई न कोई फेयर । जिसमें किसी स्थानीय ग्राउंड को किराये पर लेकर दुकानें लगवाना और धंधा करना । लोकतंत्र का चौथा पाया न हुआ दिल्ली का कोई न कोई मंगल, बुध बाजार हो गया ।</p>



<p>तो हो सकता है किसी अखबार ने ऑटो फेयर भी लगवा लिया हो । वैसे अपने सीकर शहर में ही चार हजार रजिस्टर्ड और एक दो हजार बिना रजिस्टर्ड ऑटो तो होंगे ही ।</p>



<p>हमने कहा- हम ऐसे किसी छोटे मोटे फेयर की बात नहीं कर रहे हैं । हम तो चीन के बीजिंग में कोई चार लाख वर्ग मीटर में फैले ऑटो मतलब ऑटो रिक्शा नहीं, तरह तरह की एडवांस्ड कारों की प्रदर्शनी लगाई है ।</p>



<p>बोला- मैं उस टुच्चे, छोटी आँख वाला गणेश बनाने वाले देश की बात ही नहीं करना चाहता । अरे, एक संस्कारी विश्वविद्यालय के सीधे सादे बच्चों ने एक खिलौना कुत्ता खरीदकर क्या दिखा दिया, दुनिया में हमारा मज़ाक बनाने लगा । अरे भाई ये छोटी मोटी बातें चलती रहती हैं । मैंने तो बहुत पहले सुना था कि चीन दूसरे देशों से तरह तरह के यंत्र मँगवाता है और उन्हें खोल खालकर थोड़ा बहुत इधर उधर करके अपने नाम से कुछ नया बना लेता है । उसका हमसे क्या मुकाबला । इतने वर्गमीटर में तो हम किसी छोटे मोटे उत्सव में दस-बीस लाख दीये जलवा देते हैं ।इतना बाद कार्यक्रम तो हम दस बीस लोगों को सरकारी नौकरी देने का हल्ला-गुल्ला मचाने के लिए कर देते हैं ।</p>



<p>हमने कहा- ये कारें दुनिया की सबसे एडवांस्ड कारें है । विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में चीन 2080 में चल रहा है । ये कारें बहुत से काम खुद ही कर लेती हैं । परिस्थिति के अनुसार निर्णय तक ले लेती हैं, फटाफट चार्ज हो जाती हैं, टायर फटने पर भी रुकने का काम नहीं, जरूरी हो तो उड़ भी लेंगी ।</p>



<p>बोला- बस ? ये सब विशेषताएं तो हमारे यहाँ के वाहनों में जाने कब से पाई जाती हैं । हमारे पुराणों में तो जाने कैसे कैसे अस्त्र शस्त्र हुए हैं जो अपना लक्ष्य बेधकर कर सकुशल अपने गैराज, स्टोर या तरकश में आ जाते थे । नो वेस्टिज ।</p>



<p>कारें तो जाने क्या, क्या करके कहाँ लुप्त हो जाती हैं । यहाँ तो एक सामान्य बुलडोज़र तक इतना समझदार होता है कि वह अपराधी का धर्म, जाति, वस्त्र आदि पहचान कर स्वविवेक से न्याय करके निर्णय भी कार्यान्वित कर देता है कि कहाँ, कब, किसका घर, कितना ढहाना है । जीपें भी निर्णय ले लेती हैं कि उसमें बैठा व्यक्ति कौन है, कितना बड़ा अपराधी है और उसके अनुसार फैसला करके यथा समय, यथा स्थान पलट भी जाती हैं ।</p>



<p><strong>-रमेश जोशी</strong></p>



<p></p>
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		<title>व्यंग्य- किससे किसकी रक्षा ?</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 06:36:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;ऐसे प्रोजेक्ट मोदी जी के अलावा और किसके हो सकते हैं ? कौन है जो इस लोक से बेखबर, दिन में 20-20 घंटे बिना विश्राम किए देश दुनिया और हिंदुओं का परलोक सुधारने के लिए पिला पड़ा है &#8216; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य अदहन पत्रिका पर… आज तो तोताराम वह सब कुछ हो-हवाकर &#8230;</p>
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<p><strong>&#8216;ऐसे प्रोजेक्ट मोदी जी के अलावा और किसके हो सकते हैं ? कौन है जो इस लोक से बेखबर, दिन में 20-20 घंटे बिना विश्राम किए देश दुनिया और हिंदुओं का परलोक सुधारने के लिए पिला पड़ा है &#8216; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य अदहन पत्रिका पर…</strong></p>



<p>आज तो तोताराम वह सब कुछ हो-हवाकर आया जो कुछ बनने का स्वप्न भारत को दिखाया जा रहा है और अब तक जिसे मुसलमानों और कांग्रेस ने रोक रखा था । और तो और अपनी मृत्यु के 78 साल बाद तक गाँधी और 62 साल बाद भी नेहरू जिसे साकार होने नहीं दे रहे हैं ।<br>आते ही शुरू हो गया । और वातावरण जग्गी वासुदेव की ‘शिव के साथ एक रात्रि’ की तरह धांसू हो उठा ।</p>



<p>सोमलिङ्गं नरो दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।<br>लभते फलं मनोवाञ्छितं मृतः स्वर्गं समाश्रयेत्॥</p>



<p>जो मनुष्य ज्योतिर्लिंगों में प्रथम सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है। उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है और मृत्यु के बाद वह स्वर्ग को प्राप्त होता है।<br>इसलिए हे पापात्मा मास्टर, तू भी सोमनाथ लिंग के दर्शन करके अपने पापों का प्रक्षालन कर और मृत्यु के बाद स्वर्ग को प्राप्त हो ।<br>हमने कहा- यह किसका प्रोजेक्ट है ?<br>बोला- ऐसे प्रोजेक्ट मोदी जी के अलावा और किसके हो सकते हैं ? कौन है जो इस लोक से बेखबर, दिन में 20-20 घंटे बिना विश्राम किए देश दुनिया और हिंदुओं का परलोक सुधारने के लिए पिला पड़ा है । वैसे गुजरात में सोमनाथ मंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मोदी जी जो एक बड़ा भव्य आयोजन करवा रहे हैं, अपने राजस्थान में इस प्रोजेक्ट के प्रचारक, एजेंट या प्रतिनिधि मुख्यमंत्री भजनलाल हैं जो स्कूलों की बिल्डिंगें संभालने से पहले राजस्थान के करदाताओं का पैसा खर्च करके दिल खोलकर खुले हाथ से विज्ञापन छपवा रहे हैं । भजनलाल जी ने ही यह श्लोक अपने विज्ञापन में छपवाया है और साथ ही नीचे भुगतान के लिए एक क्यू आर कोड भी दिया है । हाँ, यह स्पष्ट नहीं किया है कि कितने पैसे देने पर कितने दिन के लिए किस श्रेणी का स्वर्ग मिलेगा ।</p>



<p>हमने कहा- जब भजन लाल जी शाखा तो दूर, स्कूल में जाना भी शुरू नहीं हुए थे तब हमने 1971 में पोरबंदर के बिरला स्कूल में पढ़ाते हुए सोमनाथ के दर्शन कर लिए थे । अब जो कुछ होना होगा वह उसी के पुण्य प्रताप से हो जाएगा । रो रोकर दिए गए 2 परसेंट डी ए में से सोमनाथ जाने या कोई दान-दक्षिण देने का प्रावधान नहीं बनता ।</p>



<p>हम कोई कहीं के मुख्यमंत्री, मंत्री तो हैं नहीं जो अपनी मुख्य ड्यूटी छोड़कर सरकारी खर्च पर मुफ़्त में इस उस तीर्थ को अपवित्र करते और पाप धोते फिरें ।</p>



<p>बोला- फिर भी कुछ न कुछ तो करना ही चाहिए ।और आज तेरी शादी को 67 साल हो रहे हैं इसी उपलक्ष्य में कुछ हो जाए ।</p>



<p>हमने कहा- 1 अप्रैल को मोदी जी की शादी को भी 58 साल हो गए थे । उनको तो तूने न बधाई दी और न ही रिटायर्ड लोगों पर कुछ कृपा करने की सलाह कि अबकी डी ए चार की बजाय छह परसेंट कर दें । जबकि लक्षणों और संयोगों को देखते हुए वे निश्चित रूप से बुद्ध के अवतार सिद्ध होते हैं । उनकी जन्म पत्री देखकर ज्योतिषियों ने बताया था कि या तो यह बालक महान सन्यासी बनेगा या फिर चक्रवर्ती सम्राट । उनके वैराग्य के लक्षण देखकर माता पिता ने सिद्धार्थ की तरह उनकी जल्दी शादी कर दी और संयोग देख सिद्धार्थ की पत्नी का नाम यशोधरा और इनकी पत्नी का नाम जसोदा ।</p>



<p>बोला- यह बात तो सच है । मोदी जी एक साथ ही चक्रवर्ती सम्राट है और एक फकीर भी । देखा नहीं, कैसे धर्म और विरासत की रक्षा के लिए भागे भागे फिर रहे हैं । अगर कुछ नहीं करेंगे तो हो सकता है ये मुसलमान, ईसाई और कांग्रेसी फिर से सोमनाथ के मंदिर को फिर तोड़ न डालें । इसलिए घूम घूमकर हिंदुत्व की विरासत की रक्षा करना बहुत जरूरी है ।</p>



<p>हमने कहा- ये सब झूठ और कुप्रचार है और दूसरों के हर कार्य का श्रेय लेने की कुटिल चालाकी है । मोदी जी के जन्म से पहले देश के गृहमंत्री कांग्रेसी सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की योजना को अंतिम रूप दिया था और 8 मई 1950 को काम की शुरूआत हो गई थी । जब मोदी जी एक साल के भी नहीं थे तक कांग्रेस के बड़े नेता राजेन्द्र बाबू इसकी प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए थे ।</p>



<p>अब या तो तू जाने या भजनलाल जी या फिर मोदी जी जानें कि वे किस विरासत की किससे रक्षा कर रहे हैं ।</p>



<p><strong>-रमेश जोशी</strong></p>
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		<title>व्यंग्य &#8211; लुंगी में लोकतंत्र</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/satirist-ramesh-joshis-satire-lungi-mein-loktantra-read-on-adahan-patrika/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 May 2026 03:57:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;जब पेंट शर्ट पहनकर आये तब वोट डाल सके । कुछ तो खयाल रखा जाना चाहिए शालीनता और संस्कारों का ।यह तो सुरक्षा बलों की सज्जनता है जो ए आई सम्मिट के शर्टलेस प्रदर्शकरियों की तरह जेल में नहीं डाला ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230; तोताराम ने हमारी बात को तरजीह देते हुए &#8230;</p>
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<p>&#8216;<strong>जब पेंट शर्ट पहनकर आये तब वोट डाल सके । कुछ तो खयाल रखा जाना चाहिए शालीनता और संस्कारों का ।यह तो सुरक्षा बलों की सज्जनता है जो ए आई सम्मिट के शर्टलेस प्रदर्शकरियों की तरह जेल में नहीं डाला </strong>।&#8217;<strong> पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p>तोताराम ने हमारी बात को तरजीह देते हुए कहा- तो आज चल ही आते हैं निर्वाचन कार्यालय में मतदाता सूची में अपना नाम देखने के लिए ।</p>



<p>हमने भी तसदीक करते हुए कहा- अब लू का डर तो रहा नहीं । ले ये दो प्याज तो अपनी जेब में रख ले और दो हम और निकाल लेते हैं ।</p>



<p>बोला- कोई पेंट शर्ट तो डाल । ऐसे चलेगा क्या लुंगी में ही ।</p>



<p>हमने कहा- वैसे बुराई तो इसमें भी कुछ नहीं है ।</p>



<p>बोला- है । वह जमाना गया जब गाँधी आधी धोती में ब्रिटेन के महाराजा से मिलने चले गए थे । यह मोदी जी और शाह साहब का राज है । अब वोट डालने का भी ड्रेस कोड हो गया है । तभी बंगाल के एक मतदान केंद्र पर सुरक्षा बलों ने लुंगी वाले गणेश मजूमदार और अली मण्डल को रोक दिया । जब पेंट शर्ट पहनकर आये तब वोट डाल सके । कुछ तो खयाल रखा जाना चाहिए शालीनता और संस्कारों का ।यह तो सुरक्षा बलों की सज्जनता है जो ए आई सम्मिट के शर्टलेस प्रदर्शकरियों की तरह जेल में नहीं डाला । अगर निर्वाचन विभाग वाले बंगाल वाले सुरक्षा बालों की तरह संस्कारी और शालीन हुए तो तेरा वोट ही स्थायी रूप से काट देंगे ।</p>



<p>हमने कहा- तमिलनाडु और केरल में तो लोग सभी जगह लुंगी में चले जाते हैं । हम भी जब पोर्टब्लेयर में थे तो लुंगी में बाजार चले जाते थे । वहाँ के नमी और गरमी वाले जलवायु में यह एक बहुत बढ़िया पहनावा है ।फटाफट सूख जाती है और इस्तरी करने की भी कोई जरूरत नहीं । हमारे विद्यालय प्रबंध समिति में चेयरमैन वहाँ के शिक्षा सचिव चारी साहब एक बार आये तो वे लुंगी और हवाई चप्पल पहने हुए थे । और उनकी पत्नी तो बिना चप्पल के ही थीं ।कांग्रेस अध्यक्ष के कामराज तो हमेशा ही लुंगी पहनते थे ।</p>



<p>बोला- यह कांग्रेस का कामराज नहीं, मोदी जी का रामराज है ।</p>



<p>हमने कहा- रामराज में तो राम को हमने नंगे पाँव और एक धोती में वन वन भटकते देखा है । हनुमान जी भी एक छोटे से कपड़े की लंगोटी में ही रहते हैं । आर एस एस को भी फुल पेंट 2016 में तब उपलब्ध हुई जब मोदी जी ने उसे हजारों करोड़ के चंदे और हर प्रकार के ऑडिट से मुक्त बना दिया । संघ में सर संचालक सुदर्शन जी को हमने कई बार हाफ पेंट में, हिटलरी मुद्रा में नमस्ते सदा वत्सले गाते देखा-सुना है । हालाँकि हमें बड़ा अजीब लगा । बुजुर्ग को कम से कम धोती ही पहना देते लेकिन क्या करें गण के वेश की गरिमा से बंधे हुए थे ।</p>



<p>और जब मोदी जी ने महाबलीपुरम में जिन पिंग का स्वागत किया था तो लुंगी में ही तो थे । क्या वोट डालना इससे भी बड़ा औपचारिक आयोजन है । यह कोई ओबामा को चाय पिलाना थोड़े ही है जो 15 लाख का सोने के तारों से कढ़ा अपने नाम वाला सूट पहना जाए ।</p>



<p>बोला- लुंगी होती है सस्ती, चारखाने वाली, गरीबों की जिसे केरल में मुंडू और तमिलनाडु में कैली कहते हैं<br>संभ्रांत लोगों वाली महंगी होती है उसे वेष्टि कहते हैं । मोदी जी वाली लुंगी नहीं, वेष्टि है , महंगी । मोदी जी तो इतने सभ्य हैं कि गंगा स्नान भी पांचों कपड़ों में करते हैं । कभी अभिमान में भरकर भी अपना 56 इंची सीने का भद्दा या शालीन कैसा भी प्रदर्शन नहीं किया ।<br>हमने कहा- वैसे बंगाल के चुनावों के निवृत्त होते ही मोदी जी ने जिस शिव का त्रिशूल लिए डमरू बजाते हुए बनारस में फ़ोटो खिंचवाया वे तो दिगम्बर हैं निर्वस्त्र ,लुंगी भी नहीं । क्या उन्हें बनारस से निकाल दोगे । जो निर्वस्त्र रह सके वही शिव हो सकता है । सम्पूर्ण पारदर्शी । कोई एप्सटीन फ़ाइल नहीं । कोई भी कर ले जांच । किसी ट्रम्प और नेतनयाहू का कोई डर नहीं ।<br>शिव या महावीर वस्त्रों की कमाई नहीं खाते । वे सबके कल्याण अपने शिवत्व के कारण जाने जाते हैं, सूटबूट के कारण नहीं ।<br>वैसे राष्ट्र की सुरक्षा के लिए लुंगी उतरवाना ठीक नहीं क्योंकि लुंगी के बिना घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें निकालेंगे कैसे ?<br>फिर भी सोच किसी 70-80 वर्ष के बुजुर्ग को केवल लुंगी पहनने मात्र के लिए इस तरह लज्जित करना उचित है ?</p>



<p>बोला- मास्टर, लोकतंत्र की रक्षा के बहुत कुछ करना पड़ता है । लोकतंत्र और वह भी मदर ऑफ डेमोक्रेसी का ।</p>



<p><strong>-रमेश जोशी</strong></p>



<p></p>
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		<title>व्यंग्य &#8211; झूठ और बाललीला</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/the-satire-johnny-johnny-yes-papa-by-rahme-joshi-writer-of-jhooth-aur-baalleela-and-satirist-on-the-poem-adahan-patrika/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 06:32:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;इस कविता से बच्चे आज थोड़ी चीनी के लिए झूठ बोलना सीख रहे हैं कल को झूठ बोलकर नीरव मोदी, ललित मोदी, माल्या आदि की तरह कोई बड़ा घोटाला भी कर सकते हैं । कल को दो करोड़ नौकरी हर साल का बड़ा झूठ भी बोल सकते हैं । बुराई बढ़े उससे पहले ही उसे &#8230;</p>
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<p><strong>&#8216;इस कविता से बच्चे आज थोड़ी चीनी के लिए झूठ बोलना सीख रहे हैं कल को झूठ बोलकर नीरव मोदी, ललित मोदी, माल्या आदि की तरह कोई बड़ा घोटाला भी कर सकते हैं । कल को दो करोड़ नौकरी हर साल का बड़ा झूठ भी बोल सकते हैं । बुराई बढ़े उससे पहले ही उसे जड़ से समाप्त कर देना चाहिये ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230; </strong></p>



<p>तोताराम आते ही बोला- अब केवल शर्म से काम नहीं चलेगा । अब तो कठोर दंड का विधान होना चाहिए ।</p>



<p>हमने पूछा- किस बात के लिए । नकली रेमडेसीवीयर बनाने के लिए, नकली कफ सीरप बनाने के लिए, प्रसाद के लिए चर्बी वाला घी सप्लाई करने के लिए, नकली डिग्री से डाक्टरी करके लोगों को मार डालने के लिए, झूठेवादों से जनता के वोट लेकर सत्ता पर काबिज हो जाने और फिर उसे जुमला कहकर मुकर जाने के लिए । किस अपराध के लिए कठोर दंड का विधान होना चाहिए ।</p>



<p>बोला- नहीं, ये तो हमारी अर्थव्यवस्था के सांस्कृतिक कार्यक्रम हैं जो सत्ता से मिलकर, उसे चुनावी चंदा देकर व्यवस्थित रूप से चलते रहते हैं ।</p>



<p>हमने पूछा- तो फिर किस अपराध के लिए कठोर दंड का विधान चाहिए ?</p>



<p>बोला- अमित शाह जी ने कहा था कि अब ऐसा समय आने वाला है कि अंग्रेजी बोलने वालों को शर्म आएगी ।</p>



<p>हमने कहा- सच बात है । हमें तो अब भी जब मोदी जी, या जय शाह अंग्रेजी बोलते हैं तो शर्म आती है ।</p>



<p>बोला- मैं सब समझता हूँ तू कहाँ और क्या बोल रहा है लेकिन सच बात यह है कि अंग्रेजी ने हमारे राष्ट्र की अस्मिता और सम्मान को ही ठेस नहीं पहुंचाई है बल्कि हमारे देश के बच्चों को झूठा और मक्कार बना डाला है । वैसे यह खोज अमित शाह जी की नहीं है । यह उच्च स्तर का सत्य तो उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने खोजा है ।</p>



<p>हमने कहा- क्या है वह अंग्रेजी का आपराधिक कृत्य जिसे उपाध्याय जी ने खोजा है ?</p>



<p>बोला- उन्होंने सप्रमाण बताया है कि अंग्रेजी में एक कविता है-</p>



<p>जॉनी जॉनी<br>यस पापा<br>ईटिंग शुगर<br>नो पापा<br>ओपन योअर माउथ<br>हा हा हा</p>



<p>अब बताओ इतना बड़ा झूठ इस देश के बच्चों को अंग्रेजी कविताओं के माध्यम से सिखाया जा रहा है । सत्यवादी हरिश्चंद्र के देश में यह सब कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है । यह देश तो है ही सत्य का ।</p>



<p>हमने कहा- तो फिर देश के सभी अंग्रेजी स्कूलों को संस्कृत माध्यम कर दिया जाना चाहिए । अंग्रेजी बोलने वाले देशों से सभी संबंध तोड़ लेने चाहियें ।</p>



<p>बोला- नहीं, बस पाठ्यक्रम से ऐसी झूठ सिखाने वाली कविताएं निकाल देनी चाहियें ।</p>



<p>हमने कहा- लेकिन तोताराम, हमें तो अंग्रेज इतने अनैतिक नहीं लगे बल्कि किसी हद तक हमसे ज्यादा लोकतान्त्रिक थे । स्वतंत्रता से पहले बहुत से भारतीयों जैसे श्याम जी कृष्ण वर्मा,सावरकर, लाल हरदयाल, मदन लाल ढींगरा, गाँधी आदि ने ब्रिटेन में रहते थे हुए भारत की आजादी के लिए काम किया, संगठन बनाए, अखबार निकाले लेकिन उन्हें कभी भी स्टेंस स्वामी, सुधा भारद्वाज, हैनी बाबू, तेलतुंबड़े, उमर खालिद, देवांगना कलिता, नताशा नरवाल आदि की तरह बिना मुकदमे के अनिश्चितकाल तक के लिए हिरासत में नहीं रखा । वहाँ की किसी सुषमा स्वराज ने नहीं कहा कि भारत मूल के ऋषि सुनक को प्रधानमंत्री बनाया गया तो मैं सिर मुंडवा लूँगी ।</p>



<p>बोला- फिर भी जब कविता में जॉनी अपने पापा से चीनी खाने के बारे में झूठ बोलता है तो इससे गलत मेसेज तो जाता ही है । इस कविता से बच्चे आज थोड़ी चीनी के लिए झूठ बोलना सीख रहे हैं कल को झूठ बोलकर नीरव मोदी, ललित मोदी, माल्या आदि की तरह कोई बड़ा घोटाला भी कर सकते हैं । कल को दो करोड़ नौकरी हर साल का बड़ा झूठ भी बोल सकते हैं । बुराई बढ़े उससे पहले ही उसे जड़ से समाप्त कर देना चाहिये । तभी कवियों ने कहा है-</p>



<p>पावक बैरी रोग ऋण सपनहुँ राखिए नाहिं<br>ये थोड़े हू बढ़त पुनि माह जातं से जाहिं<br>हमने कहा- लेकिन तोताराम, अपने हिन्दी साहित्य में सूर का एक बहुत प्रसिद्ध पद है-<br>मैया मोरी, मैं नहिं माखन खायो।</p>



<p>भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो॥<br>चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।<br>मैं बालक बहिंयन को छोटो, छींको केहि बिधि पायो॥<br>ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।<br>तू जननी मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो॥<br>जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो।<br>यह ले अपनी लकुटि-कमरिया, बहुतहि नाच नचायो॥<br>&#8216;सूरदास&#8217; तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥</p>



<p>इसमें सबको पता हैं कि कृष्ण झूठ बोल रहे हैं लेकिन फिर भी माँ उसे हँसकर गले से लगा लेती है । क्या इससे झूठ बोलने का मेसेज नहीं जाता ।</p>



<p>इसी तरह जब एक बार कृष्ण हाँडी में से मक्खन चुराते हुए रँगे हाथों पकड़े जाते हैं तो वे कहते हैं कि मैं मक्खन चुरा नहीं रहा था बल्कि हाँडी में गिर गई चींटी निकाल रहा था ।</p>



<p>बोला- यह झूठ नहीं । यह कृष्ण की बाललीला है ।और हमारे यहाँ लीला का लाइसेंस तो भगवान, देवता ही क्या छोटे बड़े नेताओं सभी को है ।</p>



<p><strong>-रमेश जोशी</strong></p>



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