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	<title>व्यंग्य Archives - Adahan Patrika | अदहन पत्रिका</title>
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	<description>साहित्य, विचार और जन आंदोलन</description>
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	<title>व्यंग्य Archives - Adahan Patrika | अदहन पत्रिका</title>
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		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य- &#8217;56 इंच का छोटा बंदर&#8217;</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/ramesh-joshi-ka-vyangya-56-inch-ka-chhota-bandar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 06 Oct 2026 14:08:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लेखक- रमेश जोशी तोताराम ने आज बड़ा अजीब प्रश्न पूछा- मास्टर, बड़े से बड़ा बंदर कितना बड़ा होता है ? हमने कहा- भई बड़े से बड़े की कोई सीमा नहीं होती । वह तो बड़े से भी बड़ा होता है जैसे मोदी जी नेहरू से भी बड़े हो चुके हैं कार्यकाल के हिसाब से । &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft size-full"><img decoding="async" width="117" height="154" src="https://adahanpatrika.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-05-08-at-11.06.03-AM-1.jpeg" alt="लेखक- रमेश जोशी" class="wp-image-461"/><figcaption class="wp-element-caption">लेखक- रमेश जोशी</figcaption></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">तोताराम ने आज बड़ा अजीब प्रश्न पूछा- मास्टर, बड़े से बड़ा बंदर कितना बड़ा होता है ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- भई बड़े से बड़े की कोई सीमा नहीं होती । वह तो बड़े से भी बड़ा होता है जैसे मोदी जी नेहरू से भी बड़े हो चुके हैं कार्यकाल के हिसाब से । हो सकता है कल को कोई उनसे भी आगे निकल जाए । वैसे अब तक का रिकार्ड तो फ्रांस के लुई 14 वें के नाम है जो 72 साल तक गद्दी पर काबिज रहा , जब तक कि मर नहीं गया । अब मोदी जी तो मोदी जी है विष्णु के अवतार या फिर साक्षात विष्णु । जब तक उनका मन करे रहें । और फिर उनका विकल्प भी तो नहीं है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- हर बात को बिना बात खींच खींचकर इतना बड़ा कर देता है कि बात का मज़ा ही खराब हो जाता है । बात मोदी जी की नहीं, बंदर की हो रही थी कि बड़े से बड़ा बंदर कितना बड़ा होता होगा ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा-सामान्य रूप से बंदर चारों पैरों पर चले तो ज्यादा से ज्यादा डेढ़ फुट ऊँचाई का होता होगा और अगर दो पाँवों पर खड़ा हो जाए तो पूँछ समेत अधिक से अधिक तीन फुट का होता होगा ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- तो फिर जंतर मन्तर पर ये कॉकरोच क्या गा रहे थे- 56 इंच का छोटा बंदर । पेपर लीक कर गया बंदर ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- या तो यह इन बच्चों का अज्ञान है या फिर बड़बोलापन । इन्हें बंदर की क्षमता और खुराफ़ातों का कुछ ज्ञान नहीं है । बंदर मनुष्य का पूर्वज है और फिर शैतान भी । वह कुछ भी हो, कितना भी छोटा-बड़ा हो सकता है । जैसे लंका में घुसते समय बंदर हनुमान मशक अर्थात मच्छर के समान आकार का हो गया और फिर जब सीता जी ने उनके आकार को देखकर शंका की-</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8220;हैं सुत कपि सब तुम्हहि समाना । जातुधान अति भट बलवाना’</p>



<p class="wp-block-paragraph">तो उन्होंने विराट रूप धारण किया-</p>



<p class="wp-block-paragraph">“कनक भूधराकार सरीरा, समर भयंकर अतिबल बीरा॥”</p>



<p class="wp-block-paragraph">बंदर कुछ भी कर सकता है और अगर 56 इंच का हो तो कहना ही क्या ? चाहे तो इतिहास तक को बदल सकता है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- कैसे ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- जयपुर में बंदर आज भी कम नहीं हैं । हम तो तुझे 1964 की बात बता रहे हैं जब हम परीक्षा देने जयपुर गए थे । चांदपोल में भाई साहब के एक मित्र के यहाँ ठहरे थे । खुली छत पर बैठे पढ़ रहे थे । बीच में पाँच सात मिनट के लिए गन्ने का ज्यूस पीने के लिए बाहर गली में गए । आए तो देखा कि एक बंदर हमारा हिन्दी साहित्य का इतिहास लेकर नीम पर बैठा हुआ उसके पन्ने फाड़ फाड़कर फेंक रहा है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सारा इतिहास उलट पुलट दिया । सो बंदर छोटा हो या बड़ा, 56 इंच का या 26 का सावधान रहो ।</p>
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		<item>
		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य- &#8216;मोदी मंदिर&#8217;</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/ramesh-joshis-satire-modi-temple/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 04 Oct 2026 13:45:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[#adahan magzine]]></category>
		<category><![CDATA[#adahan patrika]]></category>
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		<category><![CDATA[#politics]]></category>
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		<category><![CDATA[#satire comedy]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लेखक- रमेश जोशी &#8216;मोदी जी के मंदिर की क्या जरूरत है । वे वैसे ही कण कण में व्याप्त हैं लाल किले से लेकर सुलभ शौचालय तक में , 5 किलो अनाज के बोरे से लेकर कोरोना के टीके के प्रमाण पत्र और रेल टिकट तक पर ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230; आज &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft size-full"><img decoding="async" width="117" height="154" src="https://adahanpatrika.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-05-08-at-11.06.03-AM-1.jpeg" alt="लेखक- रमेश जोशी" class="wp-image-461"/><figcaption class="wp-element-caption">लेखक- रमेश जोशी</figcaption></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;मोदी जी के मंदिर की क्या जरूरत है । वे वैसे ही कण कण में व्याप्त हैं लाल किले से लेकर सुलभ शौचालय तक में , 5 किलो अनाज के बोरे से लेकर कोरोना के टीके के प्रमाण पत्र और रेल टिकट तक पर ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आज तोताराम बहुत प्रसन्न था, बोला- अब तो मान ले लोहा, कर ले चमत्कार को नमस्कार ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- क्या चमत्कार हो गया ? क्या मोदी जी नोटबंदी और किसान आंदोलन में मृत लोगों, नीट पेपर आउट के मृत विद्यार्थियों, जंतर मंतर आंदोलन में अपमानित किए बच्चों या मणिपुर के पीड़ित लोगों के बारे में कुछ बोले, उनसे माफ़ी मांगी ? उनका दुख-दर्द पूछने चले गए ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- ये कोई चमत्कार थोड़े हैं । ये तो राहुल जैसे निठल्ले लोगों के काम हैं । मोदी जी का तो मंदिर बन रहा है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- इस देश में मंदिर बनना-बनाना कोई मुश्किल काम है ? कोई भी कहीं भी दो पत्थर रखकर, अगरबत्ती जला देगा तो बन गया मंदिर, हो गई मज़ार । मुश्किल तो है स्कूल बनाना, उन्हें सुविधा सम्पन्न बनाना । जहां स्कूलों से ज्यादा मंदिर-मस्जिद हों उस देश के अच्छे दिन कभी नहीं आने । फिर वे मंदिर चाहे किसी ईश्वर के हों, बुद्ध के हों या अंबेडकर के या फिर दयानंद सरस्वती के । मूर्तियाँ विचार और तर्क की बहुत बड़ी दुश्मन होती हैं । इस देश में तो पशु-पक्षियों के भी अनेक मंदिर हैं जैसे </p>



<p class="wp-block-paragraph">करणी माता मंदिर (चूहों का मंदिर): राजस्थान के बीकानेर के पास देशनोक में स्थित इस मंदिर में 25,000 से अधिक चूहे खुलेआम घूमते हैं। इन्हें यहाँ पवित्र माना जाता है और &#8216;काबा&#8217; कहा जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुक्कुरदेव मंदिर (कुत्ते का मंदिर): छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के खापरी गाँव में स्थित यह मंदिर कुत्ते को समर्पित है। माना जाता है कि यहाँ दर्शन करने से कुत्ते के काटने का भय नहीं रहता।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुतिया महारानी मंदिर: उत्तर प्रदेश के झाँसी जिले के मौरानीपुर में स्थित इस छोटे से मंदिर में एक कुतिया की मूर्ति स्थापित कर उसकी पूजा की जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मन्नारसला श्री नागराज मंदिर (सांपों का मंदिर): केरल के हरिपाड (मन्नारसला) में स्थित इस प्राचीन मंदिर में सांपों की मूर्तियों और चित्रों की भरमार है, जहाँ नाग देवता की पूजा होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बुल टेम्पल (नंदी मंदिर): कर्नाटक के बेंगलुरु में स्थित इस मंदिर में भगवान शिव के वाहन नंदी (सांड) की एक विशाल 15 फीट लंबी प्रतिमा है, जिसकी पूजा की जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">और तो और फिल्म वालों के भी मंदिर हैं जैसे</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमिताभ बच्चन (कोलकाता): जैसा कि आपने ज़िक्र किया, कोलकाता के बालीगंज (आनंद नगरी) इलाके में फैंस ने उनका एक मंदिर बनाया है, जिसे बच्चन धाम कहा जाता है। यहाँ उनकी एक मूर्ति है और उनकी फिल्म &#8216;अक्स&#8217; से प्रेरित कुर्सी व &#8216;अग्निपथ&#8217; के जूते रखे गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रजनीकांत (कर्नाटक): दक्षिण भारत के सुपरस्टार रजनीकांत के लिए फैंस ने कर्नाटक के कोलार जिले में स्थित कोटिलिंगेश्वर मंदिर में एक विशेष &#8216;सहस्र लिंगम&#8217; स्थापित किया है, जहाँ उनकी सेहत के लिए पूजा की जाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनू सूद (तेलंगाना): कोरोना महामारी के दौरान लोगों की मदद करने वाले अभिनेता सोनू सूद को फैंस ने &#8216;मसीहा&#8217; माना। तेलंगाना के डुब्बा टांडा गांव में फैंस ने सोनू सूद की मूर्ति लगाकर उनका मंदिर बनाया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सामंथा रुथ प्रभु (आंध्र प्रदेश): साउथ की मशहूर अभिनेत्री सामंथा के एक प्रशंसक ने आंध्र प्रदेश के बापटला जिले में अपने घर के अहाते में ही उनका मंदिर बना दिया और वहाँ उनकी मूर्ति स्थापित की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">निधि अग्रवाल (चेन्नई): फिल्म &#8216;इस्मार्ट शंकर&#8217; से मशहूर हुईं अभिनेत्री निधि अग्रवाल के फैंस ने चेन्नई में उनका मंदिर बनाया और उनकी मूर्ति पर दूध से अभिषेक भी किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हंसिका मोटवानी (मदुरै): अभिनेत्री हंसिका मोटवानी की लोकप्रियता जब चरम पर थी, तब तमिलनाडु के मदुरै में उनके फैंस ने उनके नाम पर एक मंदिर बनाया था, जिसमें उनकी मूर्ति लगाई गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सचिन तेंदुलकर (बिहार): क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का मंदिर बिहार के कैमूर (भभुआ) जिले के अतरवलिया गांव में बनाया गया है। यहाँ सचिन की आदमकद (लाइफ-साइज) मूर्ति लगाई गई है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नेताओं में</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनिया गांधी (तेलंगाना): कांग्रेस पार्टी की नेता सोनिया गांधी के प्रति सम्मान दिखाने के लिए तेलंगाना के एक नेता ने उनका मंदिर बनवाया था, जहाँ उनकी 9 फीट ऊंची कांसे की मूर्ति लगाई गई थी ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">और मोदी जी का भी एक मंदिर ग्वालियर में पहले से ही है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह देश विश्व गुरु है यहाँ एक दलित नेता ने अंग्रेजी का मंदिर बनवाया था ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- अगर तेरा यह मूर्ति महापुराण बंद हो तो कोई काम की बात करूँ ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- करो, करो । आज के दिन मोदी जी से बढ़कर और किसकी बात काम की बात हो सकती है ? लेकिन हमारा मानना है कि किसी भी जीवित व्यक्ति की मूर्ति या मंदिर बनाना अशुभ माना जाता है । तुझे याद है अपने गाँव में विद्या भवन नाम की युवाओं की एक संस्था थी जिसने 1962 में स्टेशन के सामने नेहरू जी की एक मूर्ति बनवाना शुरू किया था । 1963 में मूर्ति बनी और 1964 में नेहरू जी की मृत्यु । बाद में 1965 में जब इंदिरा जी अपने गाँव में आई थीं तो उन्होंने उसका अनावरण किया था । मायावती ने अपनी जीते जी मूर्तियाँ लगवा दीं । उसके बाद से घर बैठी हैं ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- लेकिन मोदी जी का यह मंदिर काई मायनों में अनोखा है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- कैसे ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- इसे ट्रांसजेंडर बोर्ड की तरफ से बनवाया जा रहा है जिसका अध्यक्ष एक ट्रांसजेंडर ही है । 5 एकड़ में सौ सवा सौ करोड़ में बनेगा मंदिर ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- जिस तरह से मंदिरों, कुम्भ मेलों, दीये जलाने के रिकार्ड बनाने में धन खर्च किया जा रहा है उसे देखते हुए यह धन कुछ भी नहीं है । फिर भी जिस देश में स्कूलों में कमरे, फर्नीचर, शौचालय, पीने का पानी नहीं है वहाँ यह एक नैतिक अपराध है । मोदी जी के मंदिर की क्या जरूरत है । वे वैसे ही कण कण में व्याप्त हैं लाल किले से लेकर सुलभ शौचालय तक में , 5 किलो अनाज के बोरे से लेकर कोरोना के टीके के प्रमाण पत्र और रेल टिकट तक पर ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोल- मंदिर की बात कुछ और होती है । सुबह शाम आरती, भजन कीर्तन, मन्नत मनौती आदि ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- लेकिन मंदिर के लिए जिस मूर्ति का पोस्टर ट्रांसजेंडर बोर्ड का अध्यक्ष ट्रांसजेंडर राजन सिंह उर्फ रंजन सिंह दिखा रहा है वह राम स्टाइल में दाढ़ी वाले मोदी जी का है । इसमें ये परशुराम, द्रोणाचार्य अधिक लगते हैं राम कम । और अगर दाढ़ी हटा दी जाए तो पता ही नहीं लगेगा कि यह है कौन । मोदी जी तो बिल्कुल नहीं लगेंगे । और दाढ़ी के साथ ट्रांसजेंडर कोई संबंध स्थापित नहीं कर पाएंगे । कोई दाढ़ी वाला हिजड़ा देखा है ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- यह तो हिजड़ों का अपना निर्णय है वे चाहें जिस विग्रह में मोदी को स्थापित करें ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- हिजड़े कन्फ्यूज तो हो जाएँगे क्योंकि मोदी जी के लाखों रूप हैं नित नये। भक्त भगवान को अपने मन के अनुसार बनाना चाहता है जैसे मांसाहारी मांस का भोग लगाएगा और शराबी अपने आराध्य को हम पियाला बनाना चाहता है । ऐसे में अगर ट्रांसजेंडरों ने मोदी जी की दाढ़ी साफ करके घाघरा चुन्नी पहनाकर ‘जियो जियो रे लला’&#8217; करवा दिया तो छप्पन इंची सीने, लाल आँख और पठान का बच्चा वाली इमेज का सत्यानाश हो जाएगा ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके साथ एक चक्कर और है । मोदी जी कहते हैं हम तो फकीर हैं, जब चाहे झोला उठाकर चल देंगे । अगर ट्रांसजेंडरों ने दाढ़ी साफ करवा दी और मोदी का मन अचानक झोला उठाने का हो गया तो खाएंगे क्या । क्योंकि दाढ़ी के बिना कोई फकीर नहीं मानता और फकीर माने बिना भीख नहीं । और दुबारा दाढ़ी बढ़ने में भी एक महिना तो लगेगा । और नकली दाढ़ी का क्या भरोसा; कब, कहाँ धोखा दे जाए । </p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य &#8211; तोताराम की जेड प्लस सुरक्षा</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/satire-by-ramesh-joshi-totaram-s-z-plus-security-read-on-adahan-magazine/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Jul 2026 15:02:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लेखक- रमेश जोशी &#8216; वे राष्ट्रवादी, संस्कारी, स्वयंसेवी संस्था के सर्वेसर्वा हैं । उनके प्रचारक सरकार में हैं । उनसे कौन कुछ माँग सकता है ? ये तो 40-50 लाख रुपये महिने की बात है उनका तो हजारों करोड़ का आधारभूत ढांचा है, अरबों का बजट है फिर भी किसी को कोई हिसाब किताब नहीं &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image is-style-rounded">
<figure class="alignleft size-full"><img decoding="async" width="117" height="154" src="https://adahanpatrika.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-05-08-at-11.06.03-AM-1.jpeg" alt="लेखक- रमेश जोशी" class="wp-image-461"/><figcaption class="wp-element-caption">लेखक- रमेश जोशी</figcaption></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216; वे राष्ट्रवादी, संस्कारी, स्वयंसेवी संस्था के सर्वेसर्वा हैं । उनके प्रचारक सरकार में हैं । उनसे कौन कुछ माँग सकता है ? ये तो 40-50 लाख रुपये महिने की बात है उनका तो हजारों करोड़ का आधारभूत ढांचा है, अरबों का बजट है फिर भी किसी को कोई हिसाब किताब नहीं देते जबकि एक छोटी सी गौशाला और दुकान चलाने वाला तक अपना हिसाब देता है ।&#8217; पढें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आज तोताराम बहुत विचलित था । इतना परेशान तो मोदी जी ट्रम्प द्वारा रूस से तेल खरीदने की मनाही या 100% टेरिफ़ की धमकी से भी नहीं हुए होंगे ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने पूछा- वत्स, इतना परेशान क्यों है ? तू तो ईडी के भयभीत तृणमूल कॉंग्रेस के सांसदों और विधायकों की तरह डरा हुआ लग रहा है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- मास्टर, ईडी का क्या है । बड़ा सरल उपाय है । भाजपा में शामिल हो जाओ । तत्काल पवित्र, ईमानदार और संस्कारी । मैं तो एक सामान्य नागरिक के नाते अपनी जान की सुरक्षा चाहता हूँ ।जहाँ तक माल का प्रश्न है तो वह तो मेरे पास है नहीं । अपने नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार का दायित्व होता है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- दायित्व तो सरकार के और भी बहुत से होते हैं लेकिन हर बस में लिखी सूचना से सरकार का उत्तर समझा जा सकता है- ‘यात्री अपने जान माल की रक्षा स्वयं करें’ । वैसे तेरी जान को खतरा किससे है ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- जब सुबह तेरे यहाँ आता हूँ तो तीन चार कुत्ते नियमित रूप से भोंक भोंककर मुझे डराते हैं जैसे कि कुछ उत्साही राष्ट्रवादी युवक मस्जिद के पास हनुमान चालीसा का पाठ करके या जय श्रीराम के नारे लगाकर मुसलमानों को डराते हैं ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- कल ध्यान से देखकर, पहचानकर बताना कहीं वे कुत्ते मुसलमान तो नहीं ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- कैसे पहचान सकता हूँ । वे कोई कपड़े थोड़े पहनते हैं । वैसे जब से भागवत जी ने कहा है कि हिन्दू और मुसलमानों का डीएनए एक है तो कन्फ्यूजन और बढ़ गया है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- ऐसे मामलों में तू भागवत जी को नहीं, हिमन्ता बिस्वा सरमा, धामी, सुवेन्दु अधिकारी, प्रवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर, योगी जी आदि को सुनाकर ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- मुझे इन बातों से कोई मतलब नहीं । बस, मुझे तो सुरक्षा चाहिए । जेड प्लस सुरक्षा जिससे तीन चार क्या हजार कुत्ते भी मेरा कुछ न बिगाड़ सकें ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- फावड़े का एक टूटा हुआ डंडा पड़ा है जाते समय ले जाना और जब भी कुत्ते भोंकें एक दो बार फटकार देना, भाग जाएंगे ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- भागवत जी तो बहुत बढ़िया लाठी चलाते हैं । मैंने एक बार स्वयंसेवकों को लट्ठ संचालन सिखाते हुए उनका वीडियो भी देखा था । अब भी क्या लट्ठ भाँजते हैं । सुना है कोई अच्छा लाठी चलाने वाला हो तो तीव्र घुमावदार संचालन से बंदूक की गोली से भी बचाव के सकता है । वैसे भी उनके अंडर में तो करोड़ों स्वयंसेवकों की सेना आती है । फिर उन्हें जेड प्लस सुरक्षा क्यों मिली हुई है ? वे न तो आयकर देते हैं, न उनकी कोई नौकरी और वेतन है । फिर जेड प्लस सुरक्षा का 40-50 लाख रुपया महिना कहाँ से देते हैं ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- वे राष्ट्रवादी, संस्कारी, स्वयंसेवी संस्था के सर्वेसर्वा हैं । उनके प्रचारक सरकार में हैं । उनसे कौन कुछ माँग सकता है ? ये तो 40-50 लाख रुपये महिने की बात है उनका तो हजारों करोड़ का आधारभूत ढांचा है, अरबों का बजट है फिर भी किसी को कोई हिसाब किताब नहीं देते जबकि एक छोटी सी गौशाला और दुकान चलाने वाला तक अपना हिसाब देता है । तूने तो सारी ज़िंदगी में 40-50 लाख नहीं कमाए होंगे । इसलिए जेड प्लस सुरक्षा की बात छोड़ । इन कुत्तों का तुष्टीकरण कर दिया कर ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- कैसे ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- जैसे राष्ट्रवादी सरकारें अपने अवैतनिक सैनिकों और भक्तों को कभी गौशाला के नाम से तो कभी काँवड़ियों के लिए भंडारे लगाने आदि के बहाने लाखों रुपया अनुदान देकर लाभान्वित करती रहती हैं</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैसे ही तू भी इन्हें कभी कभी टुकड़ा फेंक दिया कर । ये कौनसे सिद्धांतवादी हैं, है तो कुत्ते ही भले ही किसी भी धर्म, जाति और देश के हों ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य- हनुमान जी का दल-बदल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:42:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लेखक- रमेश जोशी &#8216;यह हमारा आंतरिक मामला है जैसे राम मंदिर की चोरी । हमारे राम, हमारा मंदिर, हम कुछ भी करें । कांग्रेस, राम मंदिर में दर्शन के लिए अभी तक नहीं गए लोग और जिन्होंने राम मंदिर के लिए कोई चंदा नहीं दिया उन्हें कुछ भी बोलने का कोई अधिकार नहीं है । &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div class="wp-block-image is-style-rounded">
<figure class="alignleft size-full"><img decoding="async" width="117" height="154" src="https://adahanpatrika.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-05-08-at-11.06.03-AM-1.jpeg" alt="लेखक- रमेश जोशी" class="wp-image-461"/><figcaption class="wp-element-caption">लेखक- रमेश जोशी</figcaption></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;यह हमारा आंतरिक मामला है जैसे राम मंदिर की चोरी । हमारे राम, हमारा मंदिर, हम कुछ भी करें । कांग्रेस, राम मंदिर में दर्शन के लिए अभी तक नहीं गए लोग और जिन्होंने राम मंदिर के लिए कोई चंदा नहीं दिया उन्हें कुछ भी बोलने का कोई अधिकार नहीं है । हम हनुमान को नचाएं या राम को स्कूल जाने की उम्र में गर्भगृह में बैठा दें हमारी मर्जी ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">जैसे कोई ट्रेवलिंग सेल्समैन छह दिन घूमघाम कर एक दिन के लिए घर आता है और फिर सूटकेस जमाकर निकल लेता है या जैसे मोदी जी 27 से 29 जून तक सशेल्स की ‘सम्मान समेट यात्रा’ से लौटे, सम्मान को सुरक्षित काँच की अलमारी में सजाया और फिर 6 जुलाई को केश सज्जा करवाकर, नए कपड़े लेकर, सम्मान समेटने के लिए इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया की यात्रा पर निकल गए वैसे ही तोताराम सुबह चाय पीकर गया था और लांच खाकर, दोपहर थोड़ा आराम करके फिर चार बजे आ धमका ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- मोदी जी ने तो सेवा के लिए घर परिवार छोड़ दिया । 20-20 घंटे रोज देश की सेवा के साथ साथ विश्वगुरु की जिम्मेदारी संभालने के लिए भागे फिरते हैं लेकिन तू घर पर क्यों नहीं टिकता ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- मैं चाय पीने नहीं आया हूँ । आज मंगलवार है । देश दुनिया में भूतपिशाच बहुत उपद्रव मचा रहे हैं सो चल जयपुर रोड़ तक चलते हैं । घूमना भी हो जाएगा और हनुमान जी के दर्शन भी ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- तो क्या लौट आये ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- कौन ? मोदी जी तो 11-12 जुलाई को लौटेंगे । फिर कहाँ का कार्यक्रम है मुझे पता नहीं । और हनुमान जी के कहीं जाने का सवाल नहीं उठता ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- क्या पता, हमने तो कल एक वीडियो देखा था जिसमें हनुमान जी लखनऊ में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो में नाच रहे थे लेकिन अभी तक न तो किसी संस्कारी हिन्दू की भावना आहत हुई और न ही कहीं कोई एफ आई आर हुई ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- यह हमारा आंतरिक मामला है जैसे राम मंदिर की चोरी । हमारे राम, हमारा मंदिर, हम कुछ भी करें । कांग्रेस, राम मंदिर में दर्शन के लिए अभी तक नहीं गए लोग और जिन्होंने राम मंदिर के लिए कोई चंदा नहीं दिया उन्हें कुछ भी बोलने का कोई अधिकार नहीं है । हम हनुमान को नचाएं या राम को स्कूल जाने की उम्र में गर्भगृह में बैठा दें हमारी मर्जी । हाँ, अगर कोई अन्य पार्टी या धर्म का व्यक्ति ऐसा कुकर्म करता तो दिखाते कि धर्म, भावना और सत्ता की ताकत क्या होती है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- ठीक है । लेकिन जब हनुमान जी आउट ऑफ स्टेशन हैं तो चल कर क्या करेंगे ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- वे हनुमान जी थोड़े थे । उनके हाथ में राम का ध्वज थोड़े था । उनके हाथ में भाजपा का झण्डा था जिस पर कमल का निशान साफ दिखाई दे रहा था । हो सकता है कोई संस्कारी और धार्मिक कार्यकर्ता हो जो यूपी के अगले चुनाव में टिकट पाने के लिए यह नाटक कर रहा हो ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- भले ही हम किसी संस्कारी संस्था के स्वयंसेवक नहीं हैं लेकिन राम के निस्वार्थ सेवक, पराक्रमी और सामान्य लोगों के लिए सहज सुलभ रहने वाले हनुमान जी का बहुत आदर करते हैं । अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए उनका वेश धारण करना हमें बहुत बुरा लगता है । अगर पार्टी में स्थान बनाना हो तो हनुमान बनने की जगह गाँधी नेहरू परिवार को गाली निकाल सकता था, किसी मस्जिद पर भगवा झंडा फहरा सकता था, किसी मुसलमान के फ्रिज में गौ मांस ढूंढ सकता था, किसी मस्जिद के आगे सुंदरकांड का पाठ कर सकता था, किसी तृणमूल वाले सांसद पर अंडे फेंक सकता था ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- चल, मंदिर तो चलते हैं । पक्का मान अपने जयपुर रोड़ वाले हनुमान जी यथास्थान मिलेंगे । यह होगा कोई लखनऊ कानपुर का कार्यकर्ता ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- तोताराम, यह भी हो सकता है कि ये असली हनुमान जी ही हों । अयोध्या में अपनी चौकीदारी के बावजूद ट्रस्ट के चंदा गिनती करने वाले अनट्रस्टवर्दी लोगों के कुकर्मों से दुखी होकर हमेशा के कहीं हिमालय में जा रहे हों । या उन्हें डर हो कि बचने का कोई रास्ता न देखकर ट्रस्ट वाले कहीं इन्हें ही न फँसा दें कि हनुमान जी से पूछो । यहाँ की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं की है । या यह डर रहा हो कि कहीं कोई उनकी गदा ही न गायब कर दे । दुष्टता पर उतरे आदमी का कोई ठिकाना नहीं । गदा के बिना उनसे कौन डरेगा जैसे यूएपीए, कोर्ट और ईडी के बिना सरकार से ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य- हड़बड़ी में गड़बड़ी</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/read-ramesh-joshis-complete-political-satire-hurry-creates-mess-on-adahan-patrika/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 15:03:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लेखक- रमेश जोशी &#8216;शेक्सपीयर कहते हैं नाम में क्या रखा है । सम्मान तो सम्मान है । मोदी जी ट्रम्प को ‘डोलांड’ कहते हैं और वह इन्हें ‘मोडी’ कहता है जो कि सही नहीं है लेकिन प्रेम में कोई कमी हो तो बता ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230; हमने कहा- तोताराम, जल्दी का &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph"></p>


<div class="wp-block-image is-style-rounded">
<figure class="alignleft size-full"><img decoding="async" width="117" height="154" src="https://adahanpatrika.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-05-08-at-11.06.03-AM-1.jpeg" alt="लेखक- रमेश जोशी" class="wp-image-461"/><figcaption class="wp-element-caption">लेखक- रमेश जोशी</figcaption></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;शेक्सपीयर कहते हैं नाम में क्या रखा है । सम्मान तो सम्मान है । मोदी जी ट्रम्प को ‘डोलांड’ कहते हैं और वह इन्हें ‘मोडी’ कहता है जो कि सही नहीं है लेकिन प्रेम में कोई कमी हो तो बता ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- तोताराम, जल्दी का काम शैतान का ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- मतलब ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- झूठ नहीं कहा है कि सहज पके सो मीठा होय लेकिन जिसे अपने कर्मों पर विश्वास नहीं होता और जो ईवेंट मनेजमेंट के सहारे अपनी इमेज बनाता है वह जल्दी करता है और उसी चक्कर में  भद्द पिटवाता है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- यह, वह, जो, उस आदि में लपेट कर बात मत कर । साफ साफ बता ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- जैसे चुनावी लाभ लेने के लिए शिखर के बिना ही प्राणप्रतिष्ठा कर दी गई तो राम मंदिर का गर्भगृह टपकने लगा कि नहीं ? 400 पार वाले 240 पर अटक गए और जिस राम के राज में-</p>



<p class="wp-block-paragraph">बिधु महि पूर मयूखन्हि रबि तप जेतनेहि काज।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मांगें बारिद देहिं जल रामचंद्र कें राज॥</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस दोहे अर्थ है कि राम जी के राज में चंद्रदेव अपनी अमृतमयी किरणों से पृथ्वी को परिपूर्ण रखते हैं। सूर्य देव केवल उतनी ही गर्मी देते हैं, जितनी वर्षा या अन्य कार्यों के लिए आवश्यक होती है। बादल भी ऐसे हैं जो केवल मांगने पर और आवश्यकता के अनुसार ही जल बरसाते हैं, अर्थात वहां अतिवृष्टि या अनावृष्टि जैसी कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लेकिन आज कट्टरता की राजनीति तथा मूर्खता और स्वार्थपूर्ण विकास के कारण स्थिति यह हो गई है कि गरमी भयंकर और दूर दूर तक बरसात नहीं । अल्पवृष्टि का खतरा मंडरा रहा है । जहाँ तहाँ सड़कें और पुल टूट रहे हैं । इतनी सुरक्षा और संस्कारी लोगों के ट्रस्ट, व्यवस्था में होते हुए राम लला की पादुकाएं चोरी हो गईं । और बुलडोज़र चलेगा 100 मीटर का प्लॉट खरीदने वाले लवकुश पर । हो सकता है कल को यह सिद्ध कर दिया जाए कि चोरी-वोरी कुछ नहीं हुई है बल्कि राम लला के बेटों लव कुश ने सुरक्षा की दृष्टि से सामान एक बैंक लाकर में रखवा दिया था ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हड़बड़ी का एक और ताज़ा उदाहरण देख ले । 1400 करोड़ की सहायता के बदले एक सम्मान लिया उसमें भी तीन गलतियाँ ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- तू यहाँ बरामदे में बैठा नितंबों से सुपारी फोड़ता रहता है । देश दुनिया को संभालना पड़े तो पता चले । जहाँ 240 पर अटकने की बात है तो राम के चढ़ावे और चंदे के बल पर पंजाब, बंगाल और महाराष्ट्र में खरीद-फरोख्त करके 400 पार भी हो जाएंगे ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- तो फिर पीयूष गोयल को नंबर बढ़वाने के लिए सम्मान का ड्राफ्ट फाइनल होने से पहले ही इसे अपने ट्विटर पर डालने की क्या जरूरत थी ? चल, एक और उदाहरण देते हैं । 2018 में पटेल की मूर्ति के उद्घाटन के विज्ञापन में 8-10 गलतियाँ थीं । और नया उदाहरण ओडिशा की स्कूली पाठ्य पुस्तकों का जिनमें कई हजार गलतियाँ है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- ये छोटी-मोटी बातें हैं । शेक्सपीयर कहते हैं नाम में क्या रखा है । सम्मान तो सम्मान है । मोदी जी ट्रम्प को ‘डोलांड’ कहते हैं और वह इन्हें ‘मोडी’ कहता है जो कि सही नहीं है लेकिन प्रेम में कोई कमी हो तो बता ।विदुर की पत्नी कृष्ण को देखकर इतनी भावविह्वल हो गई कि केलों की गिरी नीचे गिराकर कृष्ण को केले के छिलके खिलाती रही । रीतिकाल के कवि बिहारीलाल ने नायिका की अत्यधिक उत्सुकता बड़ा ही मनोवैज्ञानिक और सुंदर चित्रण किया है जो नायक के आने का समाचार सुनकर इतनी हड़बड़ी में होती है कि पैरों में लगाने वाला महावर आँखों में और आँखों में लगाने वाला काजल पैरों में लगा लेती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बिहारी का वह दोहा इस प्रकार है:</p>



<p class="wp-block-paragraph">काजरु दै अँखियान में, रह्यो महावरु भाल।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तिय-उतावली आँगने, करी अनूपम चाल॥</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य -कॉकरोचों का धरना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:15:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216; मदर ऑफ डेमोक्रेसी का मतलब यह भी नहीं है कि कॉकरोच भी धरना देने लगें । कल को मक्खी, मच्छर, दीमक भी धरना देने लगेंगे । लगता है अब इनका मुकाबला करने के लिए एक नई सी जे पी मतलब ‘चप्पल जनता पार्टी’ बनानी पड़ेगी जो इन्हें देखते ही चप्पल फटकारकर ठिकाने लगा देगी &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216; मदर ऑफ डेमोक्रेसी का मतलब यह भी नहीं है कि कॉकरोच भी धरना देने लगें । कल को मक्खी, मच्छर, दीमक भी धरना देने लगेंगे । लगता है अब इनका मुकाबला करने के लिए एक नई सी जे पी मतलब ‘चप्पल जनता पार्टी’ बनानी पड़ेगी जो इन्हें देखते ही चप्पल फटकारकर ठिकाने लगा देगी ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">जैसे ही तोताराम बैठने को हुआ हमने उसे आज की ब्रेकिंग न्यूज दी- कॉकरोचों का धरना अवैध घोषित कर दिया गया है ।<br>बोला- यह क्या कोई समाचार है ? कुछ कॉमन सेंस से काम लिया कर । कॉकरोच इस सृष्टि के सबसे पुराने जीवित प्राणी हैं । उनके इस सनातन का सम्मान करते हुए घर की दीवारों की दरारों, गटर, रसोई के सीलन भरे कोनों में उनके आवास और सब प्रकार का बचा-खुचा खाना खा सकने की निःशुल्क उपलब्ध करवाया जाता है । अब कॉकरोच भी धरना देने लगे । इसीलिए नीति आयोग के अमिताभ कान्त ने कहा था कि भारत में कुछ ज्यादा ही लोकतंत्र है । मदर ऑफ डेमोक्रेसी का मतलब यह भी नहीं है कि कॉकरोच भी धरना देने लगें । कल को मक्खी, मच्छर, दीमक भी धरना देने लगेंगे । लगता है अब इनका मुकाबला करने के लिए एक नई सी जे पी मतलब ‘चप्पल जनता पार्टी’ बनानी पड़ेगी जो इन्हें देखते ही चप्पल फटकारकर ठिकाने लगा देगी ।<br>हमने कहा- हम वास्तविक कॉकरोचों की बात नहीं कर रहे हैं । हम तो परीक्षा व्यवस्था से दुखी और बेकार छात्रों की बात कर रहे हैं जिन्हें मुख्य न्यायाधीश ने कॉकरोच बताया था, और जिन्होंने अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ बनाई है । वे जंतर मंतर पर थाली और चम्मच बजाय कर प्रदर्शन कर रहे थे ।<br>बोला- वैसे तो जिस तरह से ये अन्याय को मूर्खतापूर्ण और कायराना तरीके से बर्दाश्त करते हैं उससे तो ये कॉकरोच से ज्यादा कुछ लगते भी नहीं । फिर भी मदर ऑफ डेमोक्रेसी में सब बातों की आजादी है लेकिन उसका एक शिष्टाचार होता है । कोरोना के समय ताली थाली बजवाई थी कि नहीं । तब बजा लेते । अब आगे भी ऐसे मौके आएंगे तब बजा लेना और पोस्ट कर देना ताली थाली बजाते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की तरह अपना फ़ोटो । अगर कुछ और हल्ला मचाने का मन है तो बना लें ‘डी जे पी’ मतलब डिस्क जॉकी पार्टी और मस्जिदों के सामने गाएं बजायें हनुमान चालीसा । कोई कुछ नहीं कहेगा बल्कि प्रोमोजिंग युवा नेता बनने का रास्ता भी साफ हो सकता है जैसे जयपुर में दिपके को थप्पड़ मारने वाला चर्चित हो गया और तत्काल जमानत भी मिल गई ।<br>हमने कहा- जंतर मंतर तो वैसे भी प्रायः प्रदर्शन करने का स्थान रहा है जैसे रामलीला मैदान या लंदन का हाइड पार्क । भाजपा और रामदेव ने भी तो अन्ना हजारे की आड़ में रामलीला मैदान पर कब्जा जमा लिया था । और अब देखा नहीं संस्कारी और राष्ट्रवादी लोगों का शासन आने के बाद कोलकाता का रेड रोड सात दिन के लिए योग के चक्कर में बंद कर दिया कि नहीं । जबकि कुछ दिन पहले नमाज के लिए दो घंटे के लिए भी मना कर दिया गया था ।<br>बोला- अन्ना का आंदोलन भ्रष्टाचार के विरुद्ध था और योग एक अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम है । नमाज तो एक कट्टर धार्मिक कार्यक्रम है जिससे आम जनता को परेशानी होती है ।<br>हमने कहा- यह भी अजीब बात है कि मुसलमानों और ईसाइयों के कार्यक्रम तो धार्मिक होते हैं और कोई न कोई जिहाद होते हैं । इसलिए इन्हें अपने घरों में मनाने में भी सोचना पड़ता है और हिंदुओं के होली, दिवाली, दुर्गा पूजा और पथ संचलन और भगवा रैली आदि सब कार्यक्रम सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं । इसलिए इन्हें स्कूलों में भी मनाया जाना चाहिए । क्या मुसलमानों और ईसाइयों की कोई संस्कृति नहीं होती ?<br>हमें तो याद है कि हम स्कूलों में बच्चों के साथ सभी धर्मों के त्योहार बड़े सद्भाव और उत्साह से मनाते थे ।<br>बोला- तभी तो भारत में हिन्दू धर्म खतरे में पड़ गया । अब देखो मोदी जी, योगी जी, धामी जी आदि लगे तो हुए हैं सब काम छोड़कर । जब धर्म बचेगा तभी तो देश बचेगा ।<br>हमने कहा- लेकिन यह कैसा धर्म है जहाँ बिना किसी महमूद ग़ज़नवी के बिना ही राम मंदिर में करोड़ों का गबन हो गया ।<br>बोला- चुप, जो राम को बदनाम करने की कोशिश की तो । योगी जी ने कहा है कि जब तक फैसला न हो जाए तब तक इस बारे में कोई बात करके राम को बदनाम न किया जाए ।<br>हमने कहा- अजीब तमाशा और तर्क है । बदनामी चोर की होती है या जिसके घर चोरी हुई है उसकी ? कहीं इस तरह चोरों को बचाने का इरादा तो नहीं है ? सोमनाथ पर डाके से शिव बदनाम होते हैं या महमूद ग़जनवी ? हाँ, उस समय के देश-समाज के रक्षकों की कायरता जरूर रेखांकित होती है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br></p>



<p class="wp-block-paragraph"><br></p>
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		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य- योग किया ?</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/read-writer-and-satirist-ramesh-joshis-satire-did-yoga-on-adahan-patrika/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 05:54:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;जब कोई समस्या या जिम्मेदारी लेने की बात आये तो शवासन लगा लो । सभी प्रभावित लोग धीरे धीरे सिर फोड़ कर चुप हो जाएंगे और इस तरह से सभी तनाव, समस्याएं और विवाद धीरे धीरे स्वतः शांत हो जाएंगे जैसे मणिपुर विवाद, महिला पहलवान शोषण, नीट पेपर लीक&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230; &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;जब कोई समस्या या जिम्मेदारी लेने की बात आये तो शवासन लगा लो । सभी प्रभावित लोग धीरे धीरे सिर फोड़ कर चुप हो जाएंगे और इस तरह से सभी तनाव, समस्याएं और विवाद धीरे धीरे स्वतः शांत हो जाएंगे जैसे मणिपुर विवाद, महिला पहलवान शोषण, नीट पेपर लीक&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आते ही तोताराम ने पूछा- योग किया ? ठीक वैसे ही जैसे कोई मेट या मुंशी मिस्त्री से पूछता है- कितना प्लास्टर हुआ ?<br>हमने कहा- क्या योग करना कोई मजदूरी है जो तू हमारे काम की रिपोर्ट ले रहा है ? यह हमारा व्यक्तिगत मामला है । हम योग करें या भोग। तू क्यों बिना बात की अफ़सरी झाड़ रहा है । और फिर योग, भोग, तप, तंत्र-मंत्र या अन्य कोई युक्ति सब हाईवे वाले ‘धाकड़’ की तरह थोड़े किये जाते हैं । तुलसी मानस के बालकाण्ड में कहते हैं-<br>जोग जुगुति तप मंत्र प्रभाऊ। फलइ तबहिं जब करिअ दुराऊ॥<br>योग, युक्ति, तप, मंत्र सब छुपाकर किये जाते हैं तभी उनका पूरा फल मिलता है ।<br>बोला- तुझे पता होना चाहिए अब योग राष्ट्रीय कार्यक्रम हो गया है । कल छुट्टी थी लेकिन मास्टर स्कूलों में गए, और भी सरकार से लाभान्वित होने वाले या मोदी जी से लाभ पाने की उम्मीद रखने वाले सभी ने योग किया और फ़ोटो नेट पर डाले जिससे मोदी सरकार उन्हें देखकर उनकी कर्तव्यपरायणता और देशभक्ति का हिसाब-किताब रख सके । खुद मोदी जी ने कोलकाता में रेड रोड जैसी व्यस्त सड़क को सात दिन से बंद करवाकर कर मंच, कैमरे लगवाकर सभी देशभक्तों को योग सिखाया । इससे पता चलता है कि मोदी जी देशवासियों के स्वास्थ्य को लेकर कितने सजग और सक्रिय हैं ।<br>हमने कहा- दूसरों को उपदेश देना बहुत सरल होता है । तभी कबीर कहते हैं-<br>करनी मीठी खाँड सी करनी बिस की लोय<br>कथनी तज करनी करे तो बिस अमरित होय ।<br>मन वचन और कर्म की एकता ही सच्चा योग है । नहीं तो रामदेव वाला धंधा है । देशवासियों के स्वास्थ्य के लिए केवल योग से काम नहीं चलता । सबसे पहले उन्हें स्वास्थ्यवर्द्धक और पूरा भोजन चाहिए, फिर भी अगर बीमार हो जाएँ तो असली दवाइयाँ, डॉक्टर और अस्पताल चाहिएं । योग स्वस्थ रहने के लिए पथ्य-परहेज, आहार-विहार की एक भारतीय पद्धति है । वह दवा और भोजन का विकल्प नहीं है । जब राजनीतिक पार्टियां नकली दवा बनाने वाली कंपनियों से चंदा लेंगी तो स्वास्थ्य का भगवान भी मालिक नहीं हो सकता । योग का ढोंग करने, योग करो स्वस्थ रहो का नारा लगाना जिम्मेदारी से बचने का बहाना है । जैसे कि जगह जगह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा लिखवा देने से काम नहीं होता । उसके लिए विज्ञापन की बजाय शिक्षा का बजट बढ़ाना पड़ता है और बेटियों को भ्रष्ट संतों और बाहुबली नेताओं से बचाना होता है ।<br>हाँ, योग से एक फायदा तो होता है ।<br>बोला- चल तूने कुछ तो माना । बता किसी आसन का कोई फायदा ।<br>हमने कहा- तीन आसन है एक शवासन, दूसरा कूर्मासन और तीसरा मार्जर्यासन ।<br>जब कोई समस्या या जिम्मेदारी लेने की बात आये तो शवासन लगा लो । सभी प्रभावित लोग धीरे धीरे सिर फोड़ कर चुप हो जाएंगे और इस तरह से सभी तनाव, समस्याएं और विवाद धीरे धीरे स्वतः शांत हो जाएंगे जैसे मणिपुर विवाद, महिला पहलवान शोषण, नीट पेपर लीक आदि । दूसरा है कूर्मासन । जब कोई संकट आये तो कछुए की तरह अपने हाथ पैर अपने खोल में समेट कर पड़े रहो । जब संकट टल जाए तब फिर देश के विकास में लग जाओ जैसे आजादी के आंदोलन में जब देश अंग्रेजों से लड़-भिड़ रहा था तब तथाकथित देशभक्तों ने ऐसे ही कूर्मासन लगा रखा था। और अब जब संकट नहीं है तब बिना कुछ किये खुद देशप्रेमी बनकर सबको हड़काते फिर रहे हैं । तीसरा है मार्जर्यासन । मार्जरी बिल्ली को कहते हैं । कभी उसे अंगड़ाई तोड़ते देखा है ? इस आसान से रीढ़ की हड्डी लचीली हो जाती है । जिससे आप ट्रम्प जैसे किसी भी कैरियर खराब कर सकने वाले दुष्ट या फायदा पहुँचाने वाले सेठ के आगे सरलता से झुककर अपना कैरियर बचा सकते हैं और धन जुटा सकते हैं ।<br>देश का सम्मान जाए भाड़ में ।</p>



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		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य- &#8216;सर फोड़ना&#8217;</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/read-ramesh-joshis-satire-sar-fodna-on-adahana-patrika-modi-man-ki-baat-rona-comedy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 08:37:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;देखो गालिब ने भी यही कहा है कि अपने दुख का हाला मचाने में शर्म मत करो । जहाँ भी मौका मिले दुख को भुनाओ । जिस तिस की चौखट पर सिर फोड़ो ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230; आज तोताराम कुछ उदास था । कई देर चुपचाप बैठे रहने के बाद बोला- मास्टर, &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;देखो गालिब ने भी यही कहा है कि अपने दुख का हाला मचाने में शर्म मत करो । जहाँ भी मौका मिले दुख को भुनाओ । जिस तिस की चौखट पर सिर फोड़ो ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आज तोताराम कुछ उदास था । कई देर चुपचाप बैठे रहने के बाद बोला- मास्टर, तू अगर मज़ाक न उड़ाये तो एक बात कहूँ ? आज मेरा रोने को जी कर रहा है । क्या तेरे कंधे पर सिर रखकर रो लूँ । हमारे प्रभु को तो अपने सात समुद्र पार के प्रभु की स्नेहिल डांट झेलने से ही फुरसत नहीं है । ऊपर से अपना रोना ही पूरा नहीं होता तो हमारा रोना क्या सुनेंगे ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- तोताराम, हम सब मनुष्य हैं । सबकी अपनी अपनी समस्याएं हैं, सुख -दुख हैं । आते जाते रहते हैं । एक दूसरे के साथ मिल बाँटकर, रो-धोकर कर जीवन काट लेते हैं । कुछ नहीं तो अपना कंधा तो तुझे दे ही सकते हैं । रो ले, जी हल्का हो जाएगा । वैसे कल कोक्रोचों के दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल हुए वांगचुक ने कहा है कि घर पर रोने से अच्छा है सड़क पर उतरें । तो चल, हम दोनों जयपुर रोड़ पर या कलेक्ट्रेट के सामने चल कर रोयें । क्या पता, किसी का दिल ही पसीज जाए ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- इस जमाने में किसी का दिल पसीजने वाला नहीं है। इसीलिए पाँच सौ साल पहले ही रहीम जी कह गए हैं-</p>



<p class="wp-block-paragraph">रहिमन निज मन की व्यथा मन ही राखो गोय ।<br>सुन अठिलैहैं लोग सब बाँटि न लैहैं कोय ।। अपना दुख मन में छुपा कर रखो। कोई मदद नहीं करेगा, सब मज़ाक उड़ाएंगे ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तभी तो सोनिया गाँधी ने अपने जीवन के अनेक हृदयविदारक कष्ट दिल पर पत्थर रखकर चुपचाप सह लिए । क्या मिला इस देश से उसे । पहले देवर का निधन, फिर सास और पति की हत्या और स्वयंसेवी निंदकों से निरंतर निंदा- कभी बार बाला, कभी जर्सी गाय, कभी काग्रेस की विधवा । उसने अपनी जीवनी में एक पत्र में लिखा हैं- मैंने जितना जीवन राजीव के साथ बिताया है उससे अधिक जीवन इस देश में उनके बिना बिता दिया है । अगर आपको मुझसे शिकायत है तो मुझे मेरा राजीव लौटा दो, मैं इटली लौट जाऊँगी । और अगर नहीं लौटा सकते तो मुझे शांति से यहाँ की मिट्टी में मिल जाने दो ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- लेकिन दुख को चुपचाप सह लेने और घर में बैठकर रो लेने से क्या फायदा हुआ ? मोदी जी को देख, अपनी गरीबी, चाय विक्रय और चतुराई से हथियाये गए ओ बी सीत्व का कार्ड खेलकर प्रधानमंत्री बन गए और अब अपनी माँ का अपमान और गालियों का कार्ड खेलकर चुनाव जीत रहे हैं । इसलिए रोओ, नकली आँसू निकालकर रोओ, दिखा दिखाकर रोओ ।घड़ियाली आँसू रोओ ऐसे आँसू नहीं निकलें तो ग्लिसरिन लगाकर रोओ ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- लेकिन मोदी जी के पास तो गोदी मीडिया है, जनता के टेक्स का हराम का पैसा है । मैं कैसे रोने के लिए अखबार में फुल पेज का विज्ञापन छपाऊँ । वे तो मन की बात की आड़ में भी कोई न कोई मतलब का एंगल निकाल लेते हैं ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- देखो गालिब ने भी यही कहा है कि अपने दुख का हाला मचाने में शर्म मत करो । जहाँ भी मौका मिले दुख को भुनाओ । जिस तिस की चौखट पर सिर फोड़ो । वह कहता है-</p>



<p class="wp-block-paragraph">वफ़ा कैसी कहाँ का इश्क जब सर फोड़ना ठहरा<br>तो फिर ऐ संग-ए-दिल ! तेरा ही संग-ए-आस्तां क्यों हो</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसी ट्रिक को ही सभी धर्म भी अपनाते हैं क्योंकि धर्मों के पास आपकी दुनियावी समस्याओं का कोई हल नहीं है बल्कि कहीं न कहीं धर्म ही आपकी समस्या है । सभी धर्म सभी समस्याओं का एक काल्पनिक हल बताने का धंधा हैं इसीलिए वे भी आपको सिर फोड़ने के लिए तरह तरह की सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं जैसे हिंदुओं को सिर फोड़ने के लिए मूर्तियाँ और शिवलिंग, मुसलमानों के लिए काबे का काला प्रस्तर का ढांचा, यहूदियों के लिए रोने के लिए ‘विलाप की दीवार’, ईसाइयों के लिए तरह तरह के क्रॉस ।सरकारें भी तो किसी जाति के वोट लेने के लिए, उनके लिए शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार की सुविधा मुहय्या करवाने की बजाय अलग अलग जातियों के लोगों के लिए उनके महापुरुषों की मूर्तियाँ स्थापित करवा देती हैं । रोओ और फोड़ो सिर और हमें जिताते रहो चुनाव। ज्यादा ही कष्ट है तो चलो तुम्हारे नेता के जन्म दिन को राजकीय अवकाश घोषित कर देते हैं ।</p>



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		<title>रमेश जोशी का व्यंग्य- मियाँ की जूती मियाँ के सिर</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/ramesh-joshis-satire-mians-shoe-on-mians-head-read-on-adahan-patrika/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:50:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
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		<category><![CDATA[#गाय]]></category>
		<category><![CDATA[#गाय पर राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं । उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं । उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन कर काटने योग्य क्यों घोषित कर दिया जाता है ?&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">तोताराम ने बैठते ही पूछा- माताजी का क्या हाल है ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- क्या बहकी-बहकी बात कर रहा है । इस गई 20 अप्रैल को माताजी को गुजरे 26 साल हो गए और आज तू हाल पूछ रहा है ।वैसे तो प्राण निकलने के साथ ही सब खेल खत्म हो जाता है लेकिन धर्म के नाम पर मुफ़्त का माल खाने वाले परजीवी लोग स्वर्ग नरक का चक्कर चलाकर कभी श्राद्ध, कभी बरसी के नाम पर ठगते रहते हैं । मरे हुए के नाम पर जिंदा का जीना हराम किये रहते हैं । अगर इसी रफ्तार से जगद्गुरु की वैज्ञानिक सोच बढ़ती रही तो ये लोग आपके मृत माता-पिता के नाम से अपना रिचार्ज करवाने लगेंगे कि यजमान आपकी माताजी के ताजा हालचाल मिलते रहने के लिए तीन हजार का जियो का रिचार्ज करवा दीजिए ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- मैं ताई के हालचाल थोड़े पूछ रहा हूँ । मैं तो योगी जी की माताजी का हाल जानना चाहता था ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- तो फिर तुझे योगी जी से पूछना चाहिये । उनकी माताजी सावित्री देवी पौड़ी गढ़वाल में रहती हैं । अगर कुछ ऐसा वैसा हुआ होता तो अब तक तो सारे देश को खबर हो जाती ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- मैं जन्म देने वाली माता की नहीं, बल्कि बिना घोषित किए ही राष्ट्र की स्वतः सनातन माता ‘गौमाता’ की बात कर रहा हूँ जिसका कुछ मुसलमान धार्मिक नेताओं ने उसे ‘राष्ट्रीय पशु’ कहकर अपमान किया है । इन पर तो राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलता चाहिए । और फौरी न्याय के बतौर इनके घरों पर बुलडोज़र तो तत्काल चला ही दिया जाना चाहिए ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- इस संसार में सभी पशु ही तो है । शेर, बाघ, भेड़िया हिंस्र पशु हैं; गाएं, भैंस, बकरी, भेड़, घोडा, गधा आदि पालतू पशु हैं । ये चौपाये होते हैं । मनुष्य के दो पैर होते हैं । वह अपने आगे के दो पैरों को हाथों की तरह काम में लेकर औजार बना सकता है, खेती कर सकता है, समाज का निर्माण करता है इसलिए वह एक सामाजिक पशु ( सोशियल एनिमल ) है । जैसे ही मनुष्य ने दो पैरों पर खड़े होना शुरू किया वह पशु से भिन्न हो गया । बंदर भालुओं को भी राम ने अपने साथ लिया क्योंकि वे दो पैरों पर खड़े हो सकते थे और मनुष्य के परिवार के निकट ही थे । साहित्य-संगीत-कला विहीन अंध भक्त भी तो बिना सींग पूंछ के पशु ही हैं । लालची को धन-पशु कहते हैं ।कृष्ण की आठ पटरानियों में से एक ऋक्षराज जांबवान की पुत्री जांबवती थी ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- गाय हमें दूध पिलाती है इसलिए वह माता है, सभी देशवासी उसका दूध पीते हैं इसलिए वह पशु नहीं राष्ट्रमाता है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- अगर दूध पिलाने वाली माता होती है तो लोग तो भैंस, बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि का दूध भी पीते हैं । उन्हें भी माता नहीं तो कम से कम मौसी, चाची, ताई कुछ तो दर्जा दिया जाना चाहिए । और फिर जब राष्ट्रमाता है तो बंगाल में 14 साल की होने पर उसका दर्जा छीन कर काटने योग्य क्यों घोषित कर दिया जाता है ? फिर वह नॉर्थ ईस्ट और गोवा में माता क्यों नहीं है ? अगर माता है तो माता है फिर चाहे कहीं भी, कितनी भी उम्र की हो । मुसलमानों को हड़काने के लिए कुछ और, चुनाव के लिए कुछ और, और हिन्दू मालिकों के बूचड़खानों के लिए कुछ और ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">और फिर भई हमारे पासपोर्ट में तो हमारी वास्तविक माता का ही नाम लिखा हुआ है । जो माता मानते हैं उनके रिकार्ड में चेंज करवा दे । वैसे सावरकर गाय को माता नहीं, एक उपयोगी पशु मात्र मानते थे । तो क्या सावरकर पर भी एफ आई आर करोगे ? और किरण रिजिजू तो घोषित गाय भक्षक है । उसे भाजपा और मंत्रीमंडल से तो कम से कम अभी हटा दो ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- फिलहाल तो इस मादनी का कुछ करना पड़ेगा जिसने मियाँ की जूती मियाँ के सिर मार दी ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>-रमेश जोशी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>व्यंग्य &#8211; भक्त सौभाग्य सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश वाले</title>
		<link>https://adahanpatrika.com/writer-and-satirist-ramesh-joshis-political-satire-bhakta-saubhagya-singh-thakur-madhya-pradesh-wale-read-on-adahan-patrika-modi-trump/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Adahan Patrika]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 14 May 2026 12:16:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[व्यंग्य]]></category>
		<category><![CDATA[साहित्य]]></category>
		<category><![CDATA[#adahan magzine]]></category>
		<category><![CDATA[#adahan patrika]]></category>
		<category><![CDATA[#bjp]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8216;मैं किसी के बाप से डरता हूँ क्या ? मेरा सीना 28 इंच का ही सही लेकिन जितना है सालिड है । और याद रख यह बरामदा संसद है सच्ची ‘जन संसद’ कोई सेंगोल वाले राजतन्त्र की संसद नहीं है । और न ही किन्ही खरीदे हुए, ई डी से डरे हुए, दाढ़ी में तिनके &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://adahanpatrika.com/writer-and-satirist-ramesh-joshis-political-satire-bhakta-saubhagya-singh-thakur-madhya-pradesh-wale-read-on-adahan-patrika-modi-trump/">व्यंग्य &#8211; भक्त सौभाग्य सिंह ठाकुर मध्यप्रदेश वाले</a> appeared first on <a href="https://adahanpatrika.com">Adahan Patrika |  अदहन पत्रिका</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8216;मैं किसी के बाप से डरता हूँ क्या ? मेरा सीना 28 इंच का ही सही लेकिन जितना है सालिड है । और याद रख यह बरामदा संसद है सच्ची ‘जन संसद’ कोई सेंगोल वाले राजतन्त्र की संसद नहीं है । और न ही किन्ही खरीदे हुए, ई डी से डरे हुए, दाढ़ी में तिनके वालों की संसद है । और यह कोई ट्रम्प का कार्यालय थोड़े है जो ‘मे आई कम इन, सर’ कह कर डरते डरते पूछ कर आना होगा ।&#8217; पढ़ें रमेश जोशी का पूरा व्यंग्य&#8230;</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">आज जैसे ही बरामदे में झाँका तो देखा, तोताराम ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने खीजते हुए कहा- कल तुझे कहा था ना, वर्क फ्रॉम होम की तरह चाय फ्रॉम होम ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- मैं किसी के बाप से डरता हूँ क्या ? मेरा सीना 28 इंच का ही सही लेकिन जितना है सालिड है । और याद रख यह बरामदा संसद है सच्ची ‘जन संसद’ कोई सेंगोल वाले राजतन्त्र की संसद नहीं है । और न ही किन्ही खरीदे हुए, ई डी से डरे हुए, दाढ़ी में तिनके वालों की संसद है । और यह कोई ट्रम्प का कार्यालय थोड़े है जो ‘मे आई कम इन, सर’ कह कर डरते डरते पूछ कर आना होगा ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- फिर भी मोदी जी ने सच्चे देशभक्तों से राष्ट्रहित में जो अपील की है उसका तो सम्मान करना चाहिए कि नहीं ?</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- सम्मान है तो सही । मेरे घर से यहाँ आने के लिए किसी वाहन की जरूरत नहीं, कोई पेट्रोल नहीं फुँकता, और तुझे चाय पिलाने के लिए सोना आयात करने कोई अपना नाम कढ़ा 15 लाख का सूट पहनने की जरूरत भी नहीं । इसी 50 रुपए वाली घिसी लुंगी में जिसमें बंगाल में वोट तक नहीं डालने दिया जाता, निःसंकोच चाय पिला सकता है । और मैं कोई प्रश्न नहीं कर सकता कि चाय ठंडी है, एक ही पत्ती को बार बार उबाला गया है, या यह चाय नहीं लकड़ी का बुरादा है, गिलास ढंग से धोया है या नहीं आदि । और तू मोदी जी की तरह 12 साल में एक भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए बाध्य नहीं है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- लेकिन चाय पीना क्या जरूरी है ? मोदी जी ने तो यहाँ तक कहा है कि तेल भी कम खाओ । जहाँ गुजरात में हर चीज में गुड़ और मूंगफली का तेल जी भर कर होता है वहाँ के मोदी जी तेल, नमक, चीनी कुछ भी नहीं खाते । यह बात और है कि चुनावी मजबूरी में सड़क किनारे की किसी ऐसी वैसी दुकान से खूब सरसों का तेल और मिर्च डलवाकर झालमुड़ी खाली । तभी तो शंखप्रक्षालन के लिए तीरथ तीरथ जाना पड़ रहा है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फिर भी तुझे टी फ्रॉम होम ही पीना चाहिए ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बोला- तेरे यहाँ चाय पीने आना रूस से सस्ता तेल और ईरान से खाद खरीदने जैसा कोई जघन्य अपराध थोड़े है जिसके लिए ऐसे डरें जैसे कि कहीं एप्सटीन फ़ाइल न खुल जाए ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">और फिर मैं कौनसा मध्य प्रदेश के राज्य पाठ्य पुस्तक मण्डल के नव नियुक्त अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर की तरह कार्यभार संभालने के लिए कारों का काफिला लेकर आता हूँ । सुना है समाचारों के अनुसार काफिले में कम से कम 50 और अधिक से अधिक 700 कारें थीं ।जब कि पाठ्यपुस्तक वाला विभाग खान, पुल, सड़क जैसा कमाई वाला विभाग भी नहीं है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हमने कहा- उनकी क्या बात करता है ? सबसे पहले तो वे सच्चे भक्त हैं । तेरी तरह मौका परस्त नहीं हैं ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरे ‘सौभाग्य’ शाली हैं, तीसरे ‘सिंह’ और चौथे सबसे ऊपर ‘ठाकुर’ और पाँचवें ‘मध्यप्रदेश से’ हैं जहाँ से</p>



<p class="wp-block-paragraph">कोई भी विजय शाह सोफिया कुरैशी को पाकिस्तान की बहिन कहकर भी साफ बचा रह सकता है, कोई भी</p>



<p class="wp-block-paragraph">कैलाश विजयवर्गीय ‘घंटा’ बयान देकर भी खानदानी संस्कारी बना रह सकता है, नीमच में भंवर लाल को</p>



<p class="wp-block-paragraph">किसी दूसरे धर्म का लगने मात्र पर किसी भाजपा कार्यकर्ता दिनेश द्वारा पीटा जा सकता है,या</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीधी का प्रवेश शुक्ला किसी आदिवासी के सिर पर पेशाब कर सकता है ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>-रमेश जोशी</strong></p>
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